
तनाव से बढ़ता है डायबिटीज का खतरा: जानें कैसे?-क्या आप जानते हैं कि काम का तनाव आपकी सेहत को कितना प्रभावित कर सकता है? हाल ही के शोध से पता चला है कि तनाव और असुरक्षा सीधे तौर पर डायबिटीज के खतरे को बढ़ाते हैं। आइये, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं।
काम का तनाव और डायबिटीज का खतरा-एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों को अपने काम में तनाव और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है, उनमें डायबिटीज होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। खासकर, कम सामाजिक समर्थन वाले कामों में यह खतरा 24% तक बढ़ सकता है। यह अध्ययन स्वीडन में 30 लाख लोगों के डेटा पर आधारित है।
महिलाएँ क्यों हैं ज़्यादा प्रभावित?-अध्ययन में यह भी पाया गया है कि महिलाएँ इस तनाव से ज़्यादा प्रभावित होती हैं। इसका कारण यह है कि महिलाएँ अक्सर ऐसी नौकरियों में होती हैं जहाँ भावनात्मक जुड़ाव ज़्यादा होता है, लेकिन सामाजिक समर्थन कम मिलता है। इस तरह के माहौल में तनाव का स्तर बढ़ जाता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।
कार्टिसोल का रोल-तनाव के समय शरीर में कार्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन शरीर की कई प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जिसमें नींद, सूजन और ब्लड शुगर लेवल भी शामिल हैं। लेकिन ज़्यादा कार्टिसोल इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाता है, जिससे डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
कार्यस्थल पर सामाजिक समर्थन की अहमियत-काम के दौरान भावनात्मक समर्थन मिलना बेहद ज़रूरी है। अगर आपको अपने काम में भावनात्मक जुड़ाव तो है, लेकिन साथ नहीं मिल रहा है, तो यह तनाव और भी बढ़ सकता है। खासकर हेल्थकेयर, कस्टमर सर्विस या टीचिंग जैसी नौकरियों में, जहाँ भावनाओं को छिपाना पड़ता है, वहाँ यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अध्ययन में 20 तरह की नौकरियों का विश्लेषण किया गया, जिसमें आमने-सामने बातचीत की भूमिका थी। 2006 से 2020 के बीच दो लाख से ज़्यादा लोगों में टाइप 2 डायबिटीज की पुष्टि हुई। महिलाओं में डायबिटीज का खतरा 24% और पुरुषों में 20% तक बढ़ा हुआ पाया गया।



