अमेरिका-भारत के बीच तेल पर बढ़ी चर्चा: ट्रंप ने संकेत दिए, सेकेंडरी टैक्स से मिल सकती है राहत

ट्रंप का बड़ा दांव: क्या भारत को रूस से तेल खरीदने पर मिलेगी बड़ी राहत?
ट्रंप का यू-टर्न? भारत को मिल सकती है सेकेंडरी टैक्स से छूट!-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है जिसने दुनिया भर के तेल बाजारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर ‘सेकेंडरी टैक्स’ लगाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है। यह खबर भारत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, क्योंकि अगर यह टैक्स लागू हो जाता तो भारत की पहले से ही डगमगाती अर्थव्यवस्था पर एक और भारी बोझ पड़ सकता था। ट्रंप ने एक खास इंटरव्यू में कहा कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भारत जैसे बड़े तेल ग्राहक को खो दिया है, जो लगभग 40% तेल खरीद रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर ही यह टैक्स लगाया जाएगा, लेकिन शायद इसकी नौबत ही न आए। यह बयान रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच आया है, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
पुतिन-ट्रंप मुलाकात का फीका नतीजा: युद्ध पर कोई सहमति नहीं-यह महत्वपूर्ण बयान ट्रंप ने तब दिया जब वे अलास्का के रास्ते एयर फोर्स वन में फॉक्स न्यूज को इंटरव्यू दे रहे थे। वे रूस-यूक्रेन युद्ध के मसले पर राष्ट्रपति पुतिन से मिलने जा रहे थे। हालांकि, यह मुलाकात उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं रही और युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। इससे पहले, अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी एक कड़ी चेतावनी जारी की थी। उन्होंने कहा था कि अगर पुतिन के साथ बैठक का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता है, तो भारत पर रूसी तेल खरीदने के संबंध में सेकेंडरी टैक्स और भी बढ़ाए जा सकते हैं। यह चेतावनी भारत के लिए चिंता का विषय थी, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती थी।
अमेरिकी वित्त सचिव का सख्त रवैया: भारत पर बढ़ सकता है दबाव-ब्लूमबर्ग के साथ एक विशेष बातचीत में, अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने रूस के रवैये पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि पुतिन बातचीत के प्रति अधिक गंभीर और सकारात्मक रुख अपनाएंगे। बेसेंट ने इस बात पर भी जोर दिया कि रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत पर पहले से ही कुछ सेकेंडरी टैक्स लगाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो इन टैक्सेस को और बढ़ाया जा सकता है। बेसेंट ने यह भी साफ किया कि इस तरह के प्रतिबंध और टैक्स स्थायी नहीं होते; इन्हें परिस्थितियों के अनुसार बढ़ाया, घटाया या पूरी तरह से हटाया भी जा सकता है। यह बयान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत था कि उसे अपनी विदेश नीति और ऊर्जा खरीद रणनीतियों पर सावधानी से विचार करना होगा।
भारत का दृढ़ रुख: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि-ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ, जिसमें से 25% विशेष रूप से दिल्ली द्वारा रूस से तेल की खरीद पर लागू होने वाला था और जो 27 अगस्त से प्रभावी होने वाला था, भारत के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे अनुचित और अव्यवहारिक बताया। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है, जैसा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र को करना चाहिए। भारत का यह रुख दर्शाता है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, और अपने राष्ट्रीय हित को हमेशा प्राथमिकता देगा।



