देश-विदेश

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर इंदौर तक, 80 हजार ट्रकों के थमे पहिए; आयात-निर्यात कारोबार प्रभावित

वैश्विक राजनीति में अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब इंदौर के व्यापारिक गलियारों में दिखने लगा है। खाड़ी देशों में जारी अस्थिरता के कारण आयात-निर्यात का संतुलन बिगड़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप इंदौर का ट्रांसपोर्ट सेक्टर गंभीर मंदी की चपेट में है। शहर के करीब 40 प्रतिशत भारी वाहनों के पहिए थम जाने से न केवल करोड़ों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर भी संकट मंडराने लगा है।

आयात-निर्यात ठप, पोर्ट पर माल की आवाजाही रुकी 

मध्य प्रदेश का औद्योगिक हब माना जाने वाला इंदौर, पीथमपुर, देवास, मंडीदीप और सांवेर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए परिवहन की लाइफलाइन है। यहां से तैयार माल मुंबई, गुजरात और चेन्नई के बंदरगाहों (पोट्स) के जरिए मिडिल ईस्ट भेजा जाता है, जहां से वर्तमान में युद्ध जैसी स्थिति के कारण मांग और आपूर्ति दोनों बाधित हैं। इंडस्ट्रियल गुड्स और स्पेयर पार्ट्स, रेडीमेड गारमेंट्स (कपड़ा उद्योग), पेट्रोलियम और प्लास्टिक उत्पाद, पशु-आहार और अन्य कच्चा माल मुख्य रूप से प्रभावित सेक्टर हैं।

2 लाख ट्रकों वाले इंदौर में छाई वीरानी 

मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क इंदौर में ही स्थित है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शहर में लगभग 2 लाख छोटे-बड़े ट्रक, ट्राले और कंटेनरों का संचालन होता है। युद्ध के कारण उपजी मंदी की वजह से इनमें से करीब 80 हजार वाहन वर्तमान में सड़कों से दूर खड़े हैं। शहर के ट्रांसपोर्ट नगर और राजमार्गों के किनारे ट्रकों की लंबी कतारें इस मंदी की गवाही दे रही हैं।

अर्थव्यवस्था पर चौतरफा मार 

इस मंदी ने केवल बड़े ट्रांसपोर्टरों को ही नहीं, बल्कि इस क्षेत्र से जुड़े निचले स्तर के कामगारों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है । जैसे हजारों ड्राइवर, क्लीनर और पल्लेदार बेरोजगार होने की कगार पर हैं। ट्रकों के न चलने से मैकेनिक, स्पेयर पार्ट्स की दुकानें और राजमार्गों पर स्थित होटलों/ढाबों का व्यवसाय भी धराशायी हो गया है। कई फैक्ट्रियां या तो कच्चा माल न मिलने से बंद हैं या फिर अपनी क्षमता से काफी कम पर काम कर रही हैं।

सरकार से राहत की गुहार 

इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ के चेयरमैन सीएल मुकाती ने कहा:

“युद्ध के वैश्विक संकट ने स्थानीय ट्रांसपोर्ट सेक्टर की कमर तोड़ दी है। करीब एक महीने से 40 प्रतिशत ट्रकों के पहिये थमे हुए हैं। इस संकट की घड़ी में सरकार को टैक्स, ईएमआई या अन्य शुल्कों में राहत देकर इस डूबते व्यवसाय और इससे जुड़े लाखों लोगों को सहारा देना चाहिए।”

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