दिल्ली

दिल्ली-NCR में मौसम बदलने के आसार, तेज आंधी-तूफान और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी

Delhi Weather: दिल्ली-NCR में पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी के बीच अब मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार के लिए हल्की बारिश के साथ तेज आंधी-तूफान (thunderstorm ) की संभावना  को लेकर ऑरेंज अलर्ट (Orange alert) घोषित किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस बदलाव का असर अगले तीन दिनों तक, यानी 31 मई तक देखने को मिल सकता है। भीषण गर्मी के बाद अचानक मौसम में यह बदलाव लोगों को राहत तो देगा, लेकिन तेज हवाओं और बारिश के दौरान सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है। विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। इतनी तेज हवाओं से पेड़, बिजली के खंभे और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है।

तापमान में गिरावट की संभावना

IMD के मुताबिक अधिकतम तापमान जो अभी 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, वह घटकर 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं न्यूनतम तापमान में भी 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना जताई गई है। IMD ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि शुक्रवार को हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। सुबह से दोपहर के बीच हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जो कुछ समय के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है। दोपहर से रात तक आंधी-तूफान की स्थिति बनी रह सकती है, जिसमें हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है। इस दौरान बादलों की गरज और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं बन सकती हैं चुनौती

जब हवाओं की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचती है, तो मौसम वैज्ञानिक इसे गंभीर श्रेणी के तूफान के रूप में देखते हैं। मैदानी इलाकों में इस स्तर के तूफान बहुत दुर्लभ नहीं होते, लेकिन इसे सामान्य स्थिति भी नहीं माना जाता। इतनी तेज हवाएं काफी शक्तिशाली होती हैं और इनके कारण बड़े पैमाने पर असर देखने को मिल सकता है। तेज हवाओं की वजह से पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ सकते हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके अलावा बिजली और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है, जिससे नेटवर्क बाधित हो सकता है। कई जगह पेड़ों की टहनियां टूटकर सड़कों पर गिर सकती हैं, जिससे यातायात भी प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।

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