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धामी का करिश्मा फिर चला: पंचायत चुनाव में बीजेपी का जलवा, पहाड़ से मैदान तक विपक्ष चित

उत्तराखंड पंचायत चुनाव: धामी के विकास मॉडल की जीत, बीजेपी का परचम लहराया!

 सीएम धामी की रणनीति रंग लाई, जिला पंचायत में बीजेपी का दबदबा-उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का करिश्मा देखने को मिला है। पिछले चार सालों में, चाहे विधानसभा उपचुनाव हो, लोकसभा चुनाव या फिर नगर निकाय चुनाव, बीजेपी को लगातार जीत दिलाने वाले धामी ने इस बार के पंचायत चुनावों में भी विपक्ष को करारी शिकस्त दी है। कुल 12 जिला पंचायत सीटों में से 10 पर बीजेपी ने अपना परचम लहराया है, जिसमें से 5 सीटें तो निर्विरोध ही पार्टी के खाते में आ गईं। खास तौर पर रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिलों में बीजेपी की जीत ने यह साबित कर दिया है कि विकास के मुद्दे पर जनता का भरोसा पार्टी के साथ है। नैनीताल की सीटों की गिनती फिलहाल रुकी हुई है, लेकिन बाकी नतीजों से बीजेपी की प्रचंड जीत साफ दिख रही है।

ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान चुनाव में भी बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन-जिला पंचायत चुनावों के साथ-साथ, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान के पदों पर भी बीजेपी का प्रदर्शन वाकई ऐतिहासिक रहा है। पूरे प्रदेश की 89 ब्लॉक प्रमुख सीटों में से 75% से अधिक पर बीजेपी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। वहीं, ग्राम प्रधान की बात करें तो लगभग 85% सीटों पर पार्टी का कब्जा रहा है। हरिद्वार जिले की कुछ सीटें छोड़कर, बाकी पूरे उत्तराखंड में बीजेपी की लहर स्पष्ट रूप से दिखाई दी। जैसे-जैसे नतीजे सामने आए, यह साफ हो गया कि कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार, मुख्यमंत्री धामी की कुशल चुनावी रणनीति और विकास कार्यों के सामने कहीं नहीं टिक पाए। यह जीत पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला पल है।

 पहाड़ी क्षेत्रों में बीजेपी की मजबूत पकड़, विकास कार्यों का मिला इनाम-इस पंचायत चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि बीजेपी ने पहाड़ी इलाकों में अपनी पकड़ को और भी मजबूत किया है। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों ने गांव-गांव में लोगों का भरोसा जीता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण सेमीफाइनल की तरह है। धामी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पारदर्शी शासन और जमीनी स्तर पर विकास ही उनकी जीत का असली मंत्र है। विपक्ष के लिए यह नतीजे एक स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले समय में उन्हें कड़ा मुकाबला करना होगा।

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