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Grand Swiss 2025: आर वैशाली की ऐतिहासिक जीत, लगातार दूसरी बार बनीं चैंपियन

वैशाली का जलवा बरकरार: एक बार फिर ग्रैंड स्विस चैंपियन!-क्या आप जानते हैं, हमारी भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. वैशाली ने फिर से कमाल कर दिया है? जी हाँ, उन्होंने FIDE Women’s Grand Swiss टूर्नामेंट को लगातार दूसरी बार जीतकर सबको हैरान कर दिया है। और सबसे अच्छी बात? उन्होंने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में भी अपनी जगह पक्की कर ली है! सोचिए, आखिरी और ग्यारहवें राउंड में उन्होंने चीन की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन झोंगयी टैन के साथ एक ज़बरदस्त मुकाबला खेला और आखिरकार ड्रॉ पर बात बनी। इस एक ड्रॉ ने न सिर्फ़ उन्हें खिताब दिलाया, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का पल ला दिया। यह कोई पहली बार नहीं है, वैशाली ने 2023 में भी आइल ऑफ मैन (यूके) में यह टूर्नामेंट जीता था। यह जीत इस बात का सबूत है कि भारतीय महिलाएँ अब शतरंज के मैदान में किसी से पीछे नहीं हैं, बल्कि अपने पुरुष खिलाड़ियों की तरह ही परचम लहरा रही हैं। उन्होंने इस पूरे टूर्नामेंट में कुल 6 मैच जीते, सिर्फ़ 1 में हार का सामना किया और 4 मुकाबले ड्रॉ खेले। टाई-ब्रेकिंग स्कोर में थोड़ी सी बढ़त लेकर उन्होंने यह शानदार जीत हासिल की।

भाई-बहन की जोड़ी: शतरंज के इतिहास में एक नया अध्याय!-वैशाली की इस जीत की सबसे खास बात यह है कि अब वह और उनके भाई आर. प्रज्ञानानंद, दोनों ही कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में खेलने वाले हैं। यह वाकई शतरंज की दुनिया में एक ऐसा रिकॉर्ड है जो शायद ही कहीं देखने को मिले। प्रज्ञानानंद ने तो अपने शानदार प्रदर्शन से पहले ही कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाई कर लिया था। अब जब ये दोनों भाई-बहन एक साथ इस बड़े मंच पर उतरेंगे, तो यह भारतीय शतरंज के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना होगा। वैशाली की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि भारत सिर्फ़ अपने पुरुष खिलाड़ियों पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि महिला ग्रैंडमास्टर्स भी अब दुनिया को कड़ी चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह एक ऐसा पल है जब पूरा देश इन दोनों भाई-बहनों पर अपनी नजरें टिकाए रहेगा, और उम्मीद करेगा कि वे इतिहास रचें।

 अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन और भारत की महिला शक्ति-हालांकि, वैशाली के अलावा बाकी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस टूर्नामेंट में कुछ खास रंग नहीं ला पाया, और कोई भी कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाई नहीं कर सका। लेकिन, विदित गुजराती, निहाल सरीन, डी गुकेश और अरुण एरिगैसी जैसे खिलाड़ियों ने भी अपना दमखम दिखाया और कुछ अच्छे ड्रॉ और जीत हासिल की। वहीं, पुरुष वर्ग में डच खिलाड़ी अनिश गिरी ने बाजी मारी। उन्होंने अमेरिका के हैंस नीमैन को हराकर 8 अंकों के साथ टूर्नामेंट जीता। उनके साथ जर्मनी के माथियास ब्लूबाम भी कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाई करने की दौड़ में थे। लेकिन महिला वर्ग में भारत का दबदबा साफ दिखा। वैशाली के अलावा, कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख पहले ही कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाई कर चुकी थीं। इसका मतलब है कि अब भारत की तीन महिला खिलाड़ी इस बड़े टूर्नामेंट में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। यह दिखाता है कि भारत अब महिला शतरंज में भी एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है। यह तिकड़ी (हम्पी, दिव्या और वैशाली) निश्चित रूप से वर्ल्ड चेस टाइटल के लिए एक मजबूत दावेदारी पेश कर सकती है।

 कैंडिडेट्स टूर्नामेंट: वर्ल्ड चैंपियन बनने की राह-कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण इवेंट माना जाता है। इस टूर्नामेंट में जो खिलाड़ी जीत हासिल करता है, उसे मौजूदा वर्ल्ड चेस चैंपियन को चुनौती देने का मौका मिलता है। इस बार, इस टूर्नामेंट के विजेता को भारत के डी. गुकेश को चुनौती देने का अवसर मिलेगा, जो फिलहाल विश्व चैंपियन हैं। तो आप सोच सकते हैं कि आने वाला साल भारतीय शतरंज के लिए कितना ऐतिहासिक होने वाला है। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में भारतीय खिलाड़ी न केवल भाग लेंगे, बल्कि खिताब जीतने के प्रबल दावेदार भी होंगे। यह भारतीय शतरंज के सुनहरे भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है, जहाँ हमारी प्रतिभाएं विश्व मंच पर अपनी छाप छोड़ रही हैं।

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