कॉर्टिसोल क्या है? जानें इस हार्मोन का असर और इसे नेचुरली कंट्रोल करने के तरीके

क्या आपका शरीर भी ‘स्ट्रेस हार्मोन’ से परेशान है? जानें कैसे करें कंट्रोल!- आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी सेहत का ख्याल रखना भूल जाते हैं। काम का बोझ, रात की अधूरी नींद और गलत खान-पान का सीधा असर हमारे शरीर के हार्मोन्स पर पड़ता है। ऐसे में एक हार्मोन है जो बहुत अहमियत रखता है, वो है कॉर्टिसोल (Cortisol)। लोग इसे अक्सर ‘स्ट्रेस हार्मोन’ के नाम से जानते हैं, पर इसका काम सिर्फ तनाव तक ही सीमित नहीं है। यह हमारी एनर्जी, ब्लड प्रेशर, बॉडी की रोगों से लड़ने की क्षमता (इम्युनिटी) और यहां तक कि हमारी नींद के पैटर्न को भी कंट्रोल करता है। जब कॉर्टिसोल का लेवल एकदम सही बना रहता है, तो हमारा शरीर एक्टिव, स्वस्थ और संतुलित महसूस करता है। लेकिन जैसे ही यह लेवल ऊपर-नीचे होता है, हमारी सेहत पर इसका बुरा असर पड़ने लगता है। इसलिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि कॉर्टिसोल आखिर है क्या, यह क्यों बढ़ जाता है और इसे हम अपने घरेलू नुस्खों से कैसे ठीक कर सकते हैं।
कॉर्टिसोल: शरीर का वो हार्मोन जो आपको रखता है एक्टिव!- क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, कॉर्टिसोल एक खास तरह का हार्मोन है जिसे हमारी एड्रिनल ग्लैंड्स (जो किडनी के ठीक ऊपर होती हैं) बनाती हैं। जब भी हम किसी टेंशन या स्ट्रेस में होते हैं, तो हमारा शरीर कॉर्टिसोल छोड़ता है। इसका मकसद होता है कि हम किसी भी मुश्किल हालात के लिए तैयार रहें और अपनी एनर्जी का सही इस्तेमाल कर सकें। इस हार्मोन का काम बहुत फैला हुआ है। यह हमारे ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, शरीर में होने वाली सूजन को कम करता है, हमारी इम्युनिटी को भी प्रभावित करता है और रात को अच्छी नींद लाने में भी मदद करता है। सुबह के समय इसका लेवल सबसे ज़्यादा होता है, जिसकी वजह से हम दिन की शुरुआत में एनर्जी से भरपूर महसूस करते हैं। वहीं, रात को इसका लेवल कम हो जाता है ताकि हमारे शरीर को आराम मिल सके और हम सुकून से सो सकें। लेकिन, अगर यह हार्मोन लंबे समय तक बढ़ा रहे, तो शरीर थका हुआ महसूस करने लगता है, स्ट्रेस बढ़ता है, ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है और पेट के आसपास चर्बी भी जमा होने लगती है। इसलिए, कॉर्टिसोल को हमारे शरीर को बैलेंस करने वाला एक महत्वपूर्ण हार्मोन भी कह सकते हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है।
क्यों बढ़ जाता है शरीर में कॉर्टिसोल का लेवल?- जब कॉर्टिसोल का लेवल लंबे समय तक बढ़ा हुआ रहता है, तो इसे ‘कुशिंग सिंड्रोम’ (Cushing Syndrome) भी कहा जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जो हमारी जीवनशैली से जुड़े हुए हैं।
*दवाओं का असर: अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसी दवाएं ले रहा है जिनमें कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (corticosteroids) होते हैं, तो इससे कॉर्टिसोल का लेवल बढ़ सकता है।
*ग्लैंड्स में समस्या: कभी-कभी पिट्यूटरी ग्लैंड या एड्रिनल ग्लैंड में कोई ट्यूमर होने पर भी कॉर्टिसोल का उत्पादन बढ़ जाता है।
*लगातार तनाव: अगर आप लगातार किसी तरह के मानसिक दबाव या तनाव में रहते हैं, तो शरीर की प्रतिक्रिया के तौर पर कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है।
*नींद की कमी और खराब लाइफस्टाइल: पर्याप्त नींद न लेना और अनहेल्दी खान-पान व जीवनशैली भी कॉर्टिसोल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
जब कॉर्टिसोल का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर में कई तरह के बदलाव साफ दिखने लगते हैं। जैसे:
* चेहरे और पेट के हिस्से में चर्बी का जमा होना।
* मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना।
* पेट पर चौड़े और बैंगनी रंग के स्ट्रेच मार्क्स दिखना।
* ब्लड शुगर का लेवल बढ़ना, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
* ब्लड प्रेशर का हाई रहना।
* महिलाओं में चेहरे पर अनचाहे बाल उगना (जिसे हिर्सुटिज्म कहते हैं)।
* हड्डियां कमजोर हो जाना और उनके आसानी से टूटने का डर।
ये सभी संकेत बताते हैं कि आपके शरीर में कॉर्टिसोल का संतुलन बिगड़ गया है और इसे ठीक करने की सख्त जरूरत है।
कॉर्टिसोल को कंट्रोल करने के 5 असरदार और आसान तरीके!- अपने शरीर में कॉर्टिसोल के लेवल को सही रखने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे-छोटे, लेकिन बहुत असरदार बदलाव करने होंगे। ये तरीके न सिर्फ आपके स्ट्रेस को कम करेंगे, बल्कि आपके दिमाग और शरीर को भी सुकून देंगे।
1. रोजाना करें हल्की-फुल्की कसरत: हर दिन कम से कम 30 मिनट तक टहलना, योगा करना या कोई भी हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है। यह शरीर से स्ट्रेस को बाहर निकालता है और आपके मूड को बेहतर बनाता है।
2. पूरी और अच्छी नींद लें: हर रात 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना बहुत ज़रूरी है। सोने का एक निश्चित समय तय करें और सोने से ठीक पहले मोबाइल या टीवी जैसी स्क्रीन से दूरी बनाए रखें।
3. पौष्टिक और संतुलित आहार लें: अपनी डाइट में खूब सारी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स को शामिल करें। डार्क चॉकलेट, ओमेगा-3 से भरपूर मछली और ब्लूबेरी जैसे फल भी कॉर्टिसोल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
4. खूब पानी पिएं: दिन भर में 4 से 5 लीटर पानी पीना शरीर को डिटॉक्स करने और हार्मोन्स को संतुलित रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।
5. मेडिटेशन और योग का सहारा लें: गहरी सांस लेने के व्यायाम, ध्यान (मेडिटेशन) और योग जैसी चीजें स्ट्रेस को काफी हद तक कम करती हैं और कॉर्टिसोल को प्राकृतिक तरीके से कंट्रोल करने में मदद करती हैं।
इन सबके अलावा, खुलकर हंसना, गाने सुनना, नाचना और अपनी पसंद की हॉबीज पर समय बिताना भी आपके दिमाग को शांत करता है और कॉर्टिसोल के लेवल को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है।


