
सपनों की लंबी राह: अभिमन्यु ईश्वरन की कहानी-क्या आप जानते हैं अभिमन्यु ईश्वरन के बारे में? यह युवा क्रिकेटर भारतीय टीम का हिस्सा तो है, लेकिन मैदान पर डेब्यू का इंतज़ार अब तक अधूरा है। दो साल से टीम के साथ जुड़े होने के बावजूद, उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। यह सवाल हर क्रिकेट फैन के ज़हन में है – आखिर क्यों?
मौका किसी और को, प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं-अभिमन्यु की जगह टीम मैनेजमेंट ने साई सुदर्शन और करुण नायर को चुना। लेकिन इन दोनों ने भी ख़ास कमाल नहीं दिखाया। सुदर्शन के स्कोर 0, 31, 0 और 61 रहे, जो उनकी अनियमितता को दर्शाते हैं। करुण नायर को अपनी सामान्य पोजीशन से अलग जगह पर खेला गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अभिमन्यु को एक मौका देना उचित नहीं था?
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन-अभिमन्यु का फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड वाकई काबिले तारीफ़ है। 103 मैचों में 7841 रन, 27 शतक और 31 अर्धशतक! उनका औसत 48.70 है, जो उनकी काबिलियत को दर्शाता है। वे ईडन गार्डन्स जैसी मुश्किल पिचों पर भी रन बना चुके हैं। फिर भी, इंटरनेशनल डेब्यू का इंतज़ार जारी है।
कोच का वादा अधूरा-अभिमन्यु के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया कि कोच गौतम गंभीर ने अभिमन्यु को लंबा मौका देने का वादा किया था। गंभीर ने कहा था, “मैं दो-तीन मैच में किसी को नहीं हटाता, ईश्वरन लंबी रेस का घोड़ा है।” लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी, अभिमन्यु को अभी तक मौका नहीं मिला।
नंबर 3 पर क्या सही फैसला?-अभिमन्यु के पिता का मानना है कि नंबर 3 पर साई सुदर्शन की जगह अभिमन्यु को खेलना चाहिए था। उनके मुताबिक़, करुण नायर मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज़ हैं, और उन्हें टॉप ऑर्डर में खेलना सही नहीं था। अभिमन्यु हमेशा से टॉप ऑर्डर में खेलते आए हैं, और वहीं उनका असली खेल दिख सकता था।
क्या अब भी है उम्मीद?-अभिमन्यु की कहानी बताती है कि सिर्फ़ प्रतिभा ही काफी नहीं होती, मौका भी ज़रूरी है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद इंटरनेशनल डेब्यू न मिल पाना निराशाजनक है, और टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर सवाल उठाता है। क्या आने वाले समय में उन्हें वो पहला मौका मिलेगा, जिसका उन्होंने इतने सालों से इंतज़ार किया है?


