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शिक्षा

समाज में रोजगार को लेकर विमर्श बदलने की जरूरत: प्रो. गर्ग

श्री रावतपुरा विवि में स्वाबलंबन और रोजगार विषय पर व्याख्यान आयोजित

रायपुर। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में विकसित भारत अभियान के तहत देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का दौर जारी है। इसी क्रम में ‘श्री रावतपुरा सरकार व्याख्यान माला’ के तहत 8 जुलाई 2024 दिन सोमवार को श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर में ‘‘21वीं सदी का भारत: स्वाबलंबन एवं रोजगार- एक चुनौती’’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कला संकाय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता डीएवी पीजी कॉलेज, बुलंदशहर, उत्तरप्रदेश में इतिहास विभाग के प्रो० राजेश गर्ग ने अपने विचार रखे।
प्रो० गर्ग ने कहा कि आज के विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आय के विकल्प भी बनाने चाहिए। विद्यार्थियों को उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने की जरूरत है। वे इतना कौशल विकास कर लें कि उन्हें देश व विदेश में रोजगार के अवसर मिल सके। आज युवाओं को बड़ा सोचने, सामान्य से हटकर कार्य करने, मजबूत इच्छाशक्ति के साथ राष्ट्र और स्वदेशी को प्राथमिकता देने जैसे संकल्प लेना चाहिए। प्रो. गर्ग ने कहा कि आज समाज में रोजगार को लेकर सामाजिक विमर्श को बदलने की जरूरत है। स्वाबलंबन, स्वदेशी उत्पाद व स्थनीय उत्पाद को महत्व देना होगा। हमें नौकरी चाहने और करने वाला नहीं बल्कि नौकरी दाता बनने का प्रयास करना होगा।
प्रो. गर्ग ने अपने उद्बोधन में बताया कि कभी हमारा देश पूर्ण रोजगार युक्त था, यहां तक कि हमारे संस्कृत साहित्य में बेरोजगारी जैसे शब्द तक नहीं है लेकिन आक्रांताओं और अंग्रेजों ने भारत को लूटकर देश की अर्थव्यवस्था खराब कर दी थी। अब फिर से हमारा देश बहुत तेजी से विकास की राह पर अग्रसर है।
प्रो. गर्ग ने कहा कि हमें नए और समृद्ध भारत के लिए जिला केंद्रित अर्थव्यवस्था मॉडल अपनाना होगा। एक जिला एक उत्पाद जैसे व्यवसायिक कार्य करने होंगे। किसान का काम देश सेवा है। हमें यह मानकर कदम बढ़ाना होगा कि कोई काम छोटा नहीं होता। स्वाबलंबन के लिए सहकारिता बहुत लाभकारी प्रयास है। सहकारिता आधारित व्यवसाय में आय की असमानता नहीं बढ़ती है।
अपने स्वागत उद्बोधन में कुलसचिव डॉ. सौरभ कुमार शर्मा ने कहा कि स्वाबलंबन एक ज्वलंत विषय है। यदि देश को विकसित बनाना चाहते हैं तो हमें नौकरी से कुछ अलग करना होगा। अपने को इतना काबिल बनाना होगा जिससे हम केवल नौकरी न कर सकें बल्कि लोगों को नौकरी भी दे सकें।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संतोष कुमार ने किया एवं आभार प्रस्तुति कला संकायाध्यक्ष डॉ. मनीष पांडेय ने किया। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, सहायक प्राध्यापक और विद्यार्थी गण उपस्थित थे।

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