
उत्तरकाशी त्रासदी: सवालों और जवाबों का तूफ़ान-उत्तरकाशी में हुए भीषण बादल फटने की घटना ने न केवल जानमाल का नुकसान किया है बल्कि राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। इस घटना पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं, जिनपर एक नज़र डालते हैं।
एक दर्दनाक हादसा और उठते सवाल-पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और सवाल किया कि बार-बार आने वाली ऐसी आपदाओं की वजह क्या है? उनका मानना है कि जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय क्षरण एक बड़ा कारण है। उन्होंने प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के खतरों पर ज़ोर दिया।
धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर: एक विवाद-
हसन ने उत्तराखंड और हिमाचल में धार्मिक स्थलों पर कथित बुलडोजर कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल, चाहे वो मंदिर हो, मस्जिद हो या दरगाह, को गिराना गलत है। उन्होंने इसे सम्मान की कमी बताया।
आपदा और धर्म: एक विवादास्पद कड़ी-हसन ने इस प्राकृतिक आपदा को धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर कार्रवाई से जोड़कर एक विवादास्पद तर्क दिया। इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी। कई लोगों ने इस बयान की आलोचना की।
भाजपा का पलटवार-भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने हसन के बयान को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि देश के लोग आपदा पीड़ितों के लिए दुआ कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग विवाद पैदा करने में लगे हैं।
मौलाना शहाबुद्दीन का विचार-मौलाना शहाबुद्दीन ने हसन के बयान को बेतुका बताया। उनका मानना है कि प्राकृतिक आपदाएं कहीं भी, कभी भी आ सकती हैं और इन्हें धर्म से जोड़ना गलत है। उन्होंने इस संवेदनशील समय में राजनीति और धर्म को अलग रखने की अपील की।
सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया-सोशल मीडिया पर हसन के बयान की कड़ी आलोचना हुई है। कई लोगों ने इसे गैरजिम्मेदाराना बताया, जबकि कुछ ने इसे पर्यावरणीय चिंता से जोड़ा। यह घटना दिखाती है कि कैसे एक प्राकृतिक आपदा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है।




