रुपया थोड़ा मजबूत, लेकिन दबाव अब भी बरकरार – तेल की कीमतें, डॉलर की चाल और बाजार का हाल

रुपया हुआ मजबूत: लेकिन क्या ये खुशी का मौका है?-सुबह के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 11 पैसे मजबूत होकर 85.93 पर पहुँच गया। लेकिन क्या ये खुशी मनाने की बात है? आइए, जानते हैं पूरी कहानी।
शेयर बाजार में गिरावट: निवेशकों की चिंता-घरेलू शेयर बाजार में गिरावट जारी है। सेंसेक्स 127 अंक गिरकर 81,669 पर और निफ्टी 55 अंक लुढ़ककर 24,891 पर आ गया। विदेशी निवेशकों ने सोमवार को 2,539 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार में नकारात्मक माहौल बना हुआ है।
तेल की कीमतों में उछाल: रुपये पर दबाव-इज़राइल-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे तेल की सप्लाई पर चिंताएँ बढ़ गई हैं। इससे रुपये पर दबाव बना हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं।
आरबीआई का सहारा: 86.20 का अहम स्तर-ट्रेजरी विशेषज्ञ अनिल भंसल का मानना है कि अगर रुपया 86.20 के ऊपर बंद होता है, तो डॉलर 86.70 तक पहुँच सकता है। आरबीआई डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह कितना कारगर होगा, यह देखना होगा।
डॉलर इंडेक्स में बढ़त: वैश्विक स्तर पर चिंता-डॉलर इंडेक्स 0.17% बढ़कर 98.16 पर पहुँच गया है। इसका मतलब है कि अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है।
बेरोजगारी और निर्यात में गिरावट: आर्थिक चुनौतियाँ-मई में बेरोजगारी दर 5.1% से बढ़कर 5.6% हो गई है, जबकि निर्यात में भी 2.17% की गिरावट आई है। ये आर्थिक संकेतक चिंता का विषय हैं। हालाँकि, व्यापार घाटा थोड़ा कम हुआ है।
संभावित चुनौतियाँ-रुपये में हुई मामूली मजबूती के बावजूद, शेयर बाजार की कमजोरी, तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती चिंता का विषय हैं। आने वाले दिनों में रुपये पर इन कारकों का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना होगा।


