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पंजाब की परंपरा लौटेगी मैदान में: ग्रामीण खेलों को फिर से मिल रहा है जीवन

 पंजाब में पारंपरिक खेलों की वापसी: रोज़गार और संस्कृति का संगम-पंजाब सरकार ने राज्य के पारंपरिक खेलों को फिर से जीवित करने की एक बेहतरीन पहल की है। इससे न केवल राज्य की समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हज़ारों लोगों को रोज़गार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

लुप्त होती परंपराओं का पुनर्जीवन-कई वर्षों से राज्य के ग्रामीण खेल धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे थे। भगवंत मान सरकार ने इन खेलों को फिर से प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। इससे नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बचाने में मदद मिलेगी। यह पहल राज्य के युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

 पशु कल्याण पर ज़ोर-सरकार ने ‘पशु क्रूरता निवारण (पंजाब संशोधन) अधिनियम-2025’ और ‘बैलगाड़ी दौड़ संचालन नियम-2025’ को पारित किया है। इन नियमों में जानवरों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। बैलगाड़ी दौड़ में बैलों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता को सख्ती से प्रतिबंधित किया गया है। यह पहल दिखाती है कि सरकार जानवरों के कल्याण को कितना महत्व देती है।

जल्लीकट्टू से प्रेरणा, लेकिन सुरक्षा के साथ-मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के जल्लीकट्टू खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब में भी बैलगाड़ी दौड़ को इसी तरह से आयोजित किया जाएगा, लेकिन सुरक्षा के साथ। नए नियमों में बैलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय शामिल किए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दौड़ के दौरान बैलों को कोई नुकसान न पहुंचे।

 रोज़गार के नए अवसर-इस पहल से राज्य में हज़ारों लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे। बैलगाड़ी दौड़ से जुड़े कई व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में मदद मिलेगी। यह पहल न केवल संस्कृति को बचाएगी बल्कि लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाएगी।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण-यह पहल पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को बचाने और उसे आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल राज्य के पारंपरिक खेलों को जीवित रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी संस्कृति से जोड़े रखेगा। यह एक ऐसी पहल है जिससे राज्य की संस्कृति और पहचान और मज़बूत होगी।

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