दिल्ली

फिर से लौट रहा है कोरोना? इन राज्यों में बढ़े केस, दो नए वैरिएंट भी मिले

कोरोना की वापसी: क्या हमें फिर से डरना चाहिए?-भारत में कोरोना के मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे लोगों में चिंता का माहौल है। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल जैसे कई राज्यों में नए मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन क्या यह वाकई चिंता की बात है? आइए जानते हैं।

दिल्ली में कोरोना की वापसी-करीब तीन साल बाद दिल्ली में कोरोना के 23 नए मामले सामने आए हैं। सौभाग्य से, सभी मरीज़ों की हालत स्थिर है और उन्हें हल्के लक्षण ही दिख रहे हैं। हालांकि, पिछले हफ्ते में 99 नए मामले सामने आने से चिंता ज़रूर बढ़ी है। लेकिन, 19 लोगों के ठीक होने की खबर भी राहत देने वाली है। यह दिखाता है कि वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और हमें सावधान रहने की ज़रूरत है।

 महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में स्थिति-महाराष्ट्र के ठाणे में एक कोरोना मरीज़ की मौत हो गई है, जबकि 8 नए मामले सामने आए हैं। मुंबई में भी मई में 95 मामले दर्ज किए गए हैं। उत्तराखंड और हरियाणा में भी कुछ मामले सामने आए हैं। केरल में तो मई में 273 नए मामले सामने आए हैं, जो सबसे ज़्यादा हैं। कर्नाटक में भी 35 नए मामले सामने आए हैं, जिसमें एक 9 महीने का बच्चा भी शामिल है। यह साफ़ है कि वायरस देश के विभिन्न हिस्सों में फैल रहा है।

 नए वेरिएंट और विशेषज्ञों की राय-भारत में NB.1.8.1 और LF.7 नाम के दो नए कोरोना वेरिएंट्स मिले हैं। हालांकि, WHO ने इन्हें अभी निगरानी में रखने योग्य बताया है। JN.1 वेरिएंट अभी भी सबसे प्रमुख है। डॉक्टरों का मानना है कि मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है और भारत की इम्युनिटी मज़बूत है। लेकिन, हल्के लक्षणों पर भी जांच कराना ज़रूरी है।

 क्या हमें घबराना चाहिए?-पिछले संक्रमण और टीकाकरण से लोगों में अच्छी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि JN.1 वेरिएंट तेज़ी से फैलता है, लेकिन लक्षण हल्के ही रहते हैं। डायबिटीज़ या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों को ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है। दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉक्टर सुरनजीत चटर्जी का कहना है कि नए मामले हल्के हैं और अस्पताल में भर्ती की ज़रूरत नहीं पड़ रही है।

सरकार की तैयारी-सरकार राज्यों को अस्पतालों में दवाइयों और ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दे रही है। एशियाई देशों से आने वाले यात्रियों की जांच पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। हालांकि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ज़रूरी सावधानियां बरतना और हल्के लक्षणों पर भी जांच कराना ज़रूरी है।

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