आईजीएल अधिकारी बनकर साइबर ठगी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा गया

नई दिल्ली, 28 जनवरी। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) के अधिकारियों का रूप धरकर साइबर ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपिताें को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी मोबाइल ऐप के जरिए लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ाते थे। गिरफ्तार आरोपिताें की पहचान बिक्की मंडल उर्फ विक्की (22), सुमित कुमार सिंह (26) और राजीव कुमार मंडल (22) के रूप में हुई है।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम के अनुसार आरोपिताें ने दिल्ली के एक 61 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना अधिकारी को फोन कर खुद को आईजीएल का प्रतिनिधि बताया और गैस सेवा से जुड़ा काम बताकर एक मैलिशियस एपीके फाइल इंस्टॉल करवा दी। इसके बाद पीड़ित के खाते से 91,449 रुपये निकाल लिए गए। पुलिस उपायुक्त के अनुसार तकनीकी जांच में सामने आया कि आरोपित संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहे थे। पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और फील्ड जांच के आधार पर तीनों आरोपितों को आसनसोल (पश्चिम बंगाल) से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपित फोन कर खुद को सरकारी या उपयोगिता सेवा कंपनियों का अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेते थे और फर्जी ऐप डाउनलोड करवा कर बैंक खातों तक पहुंच बना लेते थे।
फिलहाल पुलिस पूरे डिजिटल नेटवर्क की जांच कर रही है और ठगी की रकम की बरामदगी व अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है। वहीं, पुलिस ने आरोपितों के पास से नौ मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनमें से सात मोबाइल की डिजिटल जांच में आईजीएल के अलावा एसबीआई योनो, आरटीओ चालान और टाटा पावर जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के नाम से बनी फर्जी एपीके फाइलें और कई पीड़ितों का डेटा मिला है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपित एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 35 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं, जिससे इनके आदतन अपराधी होने की पुष्टि होती है। मुख्य आरोपित बिक्की मंडल पश्चिम बंगाल में साइबर अपराध समेत कई मामलों में पहले भी गिरफ्तार हो चुका है। वहीं, सुमित कुमार सिंह के खिलाफ झारखंड में धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में पुराने मुकदमे दर्ज हैं।




