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किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत: दूध, पनीर और खाद-बीज पर घटा GST

दूध-पनीर हुए टैक्स-फ्री: आम आदमी और किसान दोनों की बल्ले-बल्ले!

GST काउंसिल का बड़ा फैसला: अब सस्ता होगा रोज़मर्रा का सामान-GST काउंसिल की 56वीं बैठक में आम लोगों और किसानों को बड़ी खुशखबरी मिली है। सबसे खास बात यह है कि अब दूध और पनीर पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। पहले इन पर 5% GST देना पड़ता था, लेकिन अब इसे पूरी तरह से हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि पैकेट वाला दूध और पनीर अब पहले से सस्ता मिलेगा। यह फैसला उन सभी परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो रोज़ाना दूध और दूध से बने उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। इससे घर के बजट पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा, खासकर त्योहारी सीजन से पहले यह राहत की बात है।

डेयरी उत्पादों पर भी टैक्स में भारी कटौती: त्योहारों का बजट होगा हल्का-सिर्फ दूध और पनीर ही नहीं, बल्कि घी, मक्खन और चीज़ जैसे कई और डेयरी उत्पादों पर भी टैक्स की मार कम हो गई है। पहले इन पर 12% GST लगता था, जिसे घटाकर अब सिर्फ 5% कर दिया गया है। यह बदलाव सीधे तौर पर आपकी जेब पर असर डालेगा, क्योंकि ये चीजें हमारे रोज़मर्रा के खाने-पीने का अहम हिस्सा हैं। सोचिए, त्योहारों पर बनने वाली मिठाइयों और पकवानों में मक्खन और घी का कितना इस्तेमाल होता है! टैक्स कम होने से इन चीजों की खरीदारी आसान होगी और त्योहारों का मजा दोगुना हो जाएगा। कंपनियों का भी मानना है कि इससे बिक्री बढ़ेगी और किसानों को भी अपनी मेहनत का बेहतर दाम मिलेगा। इसे तो सचमुच किसानों और ग्राहकों, दोनों के लिए ‘डबल धमाका’ कह सकते हैं!

खेती-किसानी की राह हुई आसान: मशीनों पर टैक्स में भारी कमी-

किसानों के लिए एक और बड़ी राहत की खबर है। अब खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों पर भी टैक्स काफी कम कर दिया गया है। पहले जहां 12% GST देना पड़ता था, वहीं अब इसे घटाकर सिर्फ 5% कर दिया गया है। इसमें डीजल इंजन, हैंड पंप, सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन के नोजल, स्प्रिंकलर और खेत की जुताई से लेकर फसल कटाई और गहाई तक की मशीनें शामिल हैं। इतना ही नहीं, खाद बनाने की मशीनें, छोटे ट्रैक्टर और हाथ से चलने वाले औजार भी अब सस्ते हो जाएंगे। इसका सीधा मतलब है कि किसान अब कम पैसों में अपनी जरूरत के उपकरण खरीद पाएंगे, जिससे खेती का खर्च कम होगा और पैदावार बढ़ेगी। सरकार का यह कदम किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा, ताकि वे कम मेहनत में ज्यादा फसल उगा सकें।

खाद-उर्वरक हुए सस्ते: किसानों की लागत घटी, उत्पादन बढ़ेगा-खेती में खाद और उर्वरक बहुत जरूरी होते हैं, लेकिन इनकी बढ़ती कीमतें अक्सर किसानों के लिए सिरदर्द बन जाती हैं। इस बार GST काउंसिल ने इस बोझ को भी काफी हद तक कम कर दिया है। सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड और अमोनिया जैसे जरूरी रसायनों पर, जो खाद बनाने में इस्तेमाल होते हैं, GST को 18% से घटाकर सिर्फ 5% कर दिया गया है। इससे खाद बनाने वाली कंपनियों की लागत कम होगी और इसका फायदा किसानों तक पहुंचेगा, जो खाद सस्ते दामों पर खरीद पाएंगे। जानकारों का मानना है कि अगर किसानों को समय पर और सही दाम पर खाद मिलेगी, तो उनकी खेती की लागत कम होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। यह किसानों की आय बढ़ाने और देश के खाद्य उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

जैविक खेती को बढ़ावा: कीटनाशकों पर भी टैक्स में कटौती-आजकल रासायनिक कीटनाशकों की जगह जैविक कीटनाशकों का चलन बढ़ रहा है, जो सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए बेहतर हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, GST काउंसिल ने किसानों को एक और बड़ी राहत दी है। अब बैसिलस थुरिनजेंसिस, ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास और नीम-आधारित कीटनाशकों जैसे बायोपेस्टिसाइड्स पर लगने वाले GST को 12% से घटाकर सिर्फ 5% कर दिया गया है। इस फैसले से किसान अब और भी आसानी से जैविक खेती की ओर बढ़ पाएंगे। बायोपेस्टिसाइड्स न केवल फसलों को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते। यह कदम टिकाऊ खेती को बढ़ावा देगा और लंबे समय में किसानों को जैविक उत्पादों की ओर मोड़ने में मदद करेगा, जिससे उपभोक्ताओं को भी बेहतर गुणवत्ता वाला और सुरक्षित अनाज मिलेगा।

ट्रैक्टर और उसके पुर्जे भी हुए सस्ते: खेती की लागत में आएगी कमी-किसानों के लिए ट्रैक्टर उनकी खेती का सबसे अहम साथी होता है। इसी बात को समझते हुए, GST काउंसिल ने ट्रैक्टर और उसके पुर्जों पर लगने वाले टैक्स को भी काफी कम कर दिया है। पहले इन पर 18% GST लगता था, जिसे घटाकर अब सिर्फ 5% कर दिया गया है। इसमें ट्रैक्टर के टायर-ट्यूब, इंजन के पार्ट्स, हाइड्रॉलिक पंप, गियर बॉक्स, ब्रेक असेंबली और रेडिएटर जैसे जरूरी हिस्से शामिल हैं। इससे न केवल ट्रैक्टर की खरीद सस्ती होगी, बल्कि उनके रखरखाव और मरम्मत का खर्च भी कम हो जाएगा। किसान अपने ट्रैक्टर को बेहतर स्थिति में रख पाएंगे, जिससे खेती की कुल लागत कम होगी और उत्पादन में भी वृद्धि होगी। किसानों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि ट्रैक्टर उनकी रोजी-रोटी का मुख्य साधन है।

किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए ‘जीत-जीत’ की स्थिति-GST काउंसिल के इन फैसलों से किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है। किसानों का खेती से जुड़ा खर्च कम होगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना है। वहीं, उपभोक्ताओं को दूध, पनीर, घी और मक्खन जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें अब सस्ते दामों पर मिलेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से खेती और डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। डेयरी कंपनियों का कहना है कि इससे दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जो अंततः किसानों की आय को स्थिर करने में मदद करेगा। यह फैसला ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए भी बहुत राहत भरा है, क्योंकि वे भी अब इन आवश्यक वस्तुओं का लाभ कम कीमत पर उठा पाएंगे।

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