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पोस्ट-सेल डिस्काउंट पर बड़ा फैसला: अब नहीं लगेगा GST, जानिए कब देना होगा टैक्स

जीएसटी का बड़ा ऐलान: अब डीलरों को पोस्ट-सेल डिस्काउंट पर नहीं देना होगा टैक्स!-केंद्र सरकार ने जीएसटी को लेकर जो स्पष्टीकरण जारी किया है, उससे व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। अब से, जब कोई निर्माता कंपनी अपने डीलरों को केवल बिक्री बढ़ाने या बाज़ार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सेल के बाद छूट (पोस्ट-सेल डिस्काउंट) देती है, तो उस पर जीएसटी नहीं लगेगा। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है क्योंकि इससे पहले इस मामले में काफी उलझनें थीं। सरकार की ओर से सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने यह साफ कर दिया है कि सामान्य ट्रेड डिस्काउंट को किसी विशेष सेवा के तौर पर नहीं देखा जाएगा, जिस पर जीएसटी लगाया जा सके। यह कदम उन सभी व्यापारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो इस नियम को लेकर चिंतित थे।

 कब लगेगा GST और कब नहीं: बारीकियों को समझना जरूरी-सरकार ने इस मामले को और भी स्पष्ट करते हुए बताया है कि जीएसटी कब लागू होगा और कब नहीं। यदि निर्माता और डीलर के बीच ऐसा कोई करार है जिसके तहत डीलर, निर्माता की ओर से किसी तरह की प्रचार-प्रसार गतिविधि (प्रमोशनल एक्टिविटी) में शामिल होता है, जैसे कि ब्रांडिंग, विज्ञापन अभियान चलाना, ग्राहकों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करना या किसी प्रदर्शनी में भाग लेना, तो ऐसी गतिविधियों पर जीएसटी लगेगा। लेकिन, अगर डीलर सिर्फ अपनी बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से छूट प्राप्त करता है और इसके बदले में निर्माता के लिए कोई अलग से सेवा प्रदान नहीं करता है, तो उस छूट पर जीएसटी नहीं लगाया जाएगा। सीधी बात यह है कि टैक्स तभी लगेगा जब डीलर और निर्माता के बीच हुए समझौते में स्पष्ट रूप से प्रमोशनल सेवाओं का उल्लेख हो और डीलर उन सेवाओं को प्रदान करे।

 कारोबारियों की चिंताएं अब दूर: टैक्स का बोझ कम-टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह फैसला बिल्कुल सही दिशा में उठाया गया कदम है। इससे डीलरों को अब हर तरह के डिस्काउंट पर टैक्स लगने के डर से मुक्ति मिल गई है। राजत मोहन, जो एएमआरजी एंड एसोसिएट्स से जुड़े हैं, बताते हैं कि अक्सर डीलर अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए छोटे-मोटे मार्केटिंग अभियान खुद चलाते हैं, जो उनकी अपनी कमाई बढ़ाने के लिए होते हैं, न कि सीधे तौर पर निर्माता के लिए। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे सामान्य डिस्काउंट को किसी अलग सेवा के रूप में नहीं गिना जाएगा। इससे डीलरों पर अतिरिक्त जीएसटी का बोझ नहीं पड़ेगा और उनका कारोबार पहले की तरह सुचारू रूप से चलता रहेगा।

टैक्स विशेषज्ञों की राय: बिजनेस की हकीकत के अनुरूप फैसला-ईवाई टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल के अनुसार, यह सर्कुलर (सरकारी आदेश) सामान्य ट्रेड डिस्काउंट और किसी विशेष सेवा के बीच के अंतर को बहुत अच्छी तरह से स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि जब डीलर और निर्माता एक-दूसरे के साथ ‘प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल’ के आधार पर काम करते हैं, तो डिस्काउंट केवल बिक्री बढ़ाने का एक तरीका होता है, न कि कोई सेवा। यह फैसला टैक्स के नियमों को व्यावसायिक तौर-तरीकों के अनुरूप बनाता है, जिससे भविष्य में होने वाले विवादों की संभावना काफी कम हो जाती है। यह व्यवसायों के लिए एक बड़ी राहत है क्योंकि अब उन्हें पता है कि किस तरह के लेनदेन पर टैक्स लगेगा और किस पर नहीं।

कारोबार पर सकारात्मक असर: स्पष्टता से बढ़ेगा भरोसा-ग्रांट थॉर्नटन भारत के मनोज मिश्रा का कहना है कि पोस्ट-सेल डिस्काउंट को लेकर जारी किया गया यह सर्कुलर लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी उलझन को समाप्त करता है। उन्होंने बताया कि अब जब भी फाइनेंशियल या कमर्शियल क्रेडिट नोट जारी किए जाएंगे, तो इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह डीलरों के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय था, जो अब दूर हो गया है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि अब कारोबारियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने सभी कॉन्ट्रैक्ट्स और क्रेडिट नोट्स को ठीक से व्यवस्थित और प्रलेखित (डॉक्यूमेंट) करें ताकि भविष्य में किसी भी तरह की समस्या से बचा जा सके।

 यह फैसला क्यों है इतना अहम: जीएसटी को सरल बनाने की ओर एक कदम-यह फैसला न केवल करदाताओं (टैक्सपेयर्स) के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि जीएसटी प्रणाली को और भी अधिक स्पष्ट और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब व्यवसायों को यह स्पष्ट रूप से पता होगा कि उन्हें कब टैक्स देना है और कब नहीं, जिससे अनावश्यक कानूनी मामलों और मुकदमेबाजी से बचा जा सकेगा। यह स्पष्टता व्यवसायों के बीच विश्वास पैदा करेगी और टैक्स संबंधी नियमों का पालन करना भी आसान बनाएगी। सरकार का यह कदम जीएसटी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है, जो व्यापार जगत के लिए निश्चित रूप से फायदेमंद होगा।

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