मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री प्रधान और शेखावत आज उज्जैन में करेंगे साइंस सेंटर का लोकार्पण

उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में आज शुक्रवार को उज्जैन में निर्मित साइंस सेंटर लोकार्पण होगा। इस अवसर पर उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ का भी शुभारंभ होगा।
एमपीसीएसटी के डायरेक्टर जनरल डॉ. अनिल कोठारी ने बताया कि प्रात: 10 से 10:30 बजे के बीच उज्जैन साईंस सेंटर का लोकार्पण होगा। इसके पश्चात महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम प्रदर्शनी का शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही तीन दिवसीय महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम पर आधारित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का उद्घाटन भी तारामंडल परिसर में अतिथियों की उपस्थिति में होगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी, नेशनल कार्डीनेटर आईकेएस नई दिल्ली डॉ. गंती एस मूर्ति, राष्ट्रीय नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत भी शामिल होंगे।
जनसम्पर्क अधिकारी जूही श्रीवास्वत ने बताया कि उज्जैन में 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित नव-निर्मित साइंस सेंटर में गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन एवं स्टूडेंट एक्टिविटी हॉल, हेरिटेज थीम आधारित गैलरी और एग्जिबिट डेवलपमेंट लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आमजन में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने बताया कि 05 अप्रैल तक चलने वाले ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यूएवी (मानवरहित विमान), आरसी (रिमोट कंट्रोल) तकनीक और सैटेलाइट निर्माण जैसे विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही सूर्य के सन स्पॉट का सुरक्षित अवलोकन, टेलीस्कोप से रात्रि आकाश का अध्ययन, विद्यार्थी-शिक्षक संवाद तथा अंतरिक्ष तकनीक आधारित प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित होंगे, जिनका उद्देश्य युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को बढ़ावा देना है।
यह सम्मेलन मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान शामिल हैं। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों के प्रतिनिधिय सहभागिता करेंगे।
उज्जैन-डोंगला को ग्लोबल मेरिडियन बनाने पर होगी चर्चा
जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां से कर्क रेखा गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान्ह रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक ‘टाइम स्केल सेंटर’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का संगम
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इनमें विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स और कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इनमें नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रो. यासुहाइड होबारा, इसरो के अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. निलेश देसाई, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, भारतीय खगोल विज्ञान संस्थान बेंगलुरु की निदेशक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम और अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शामिल होंगे।



