उत्तरप्रदेश

कानपुर में सात दिनों तक खेली जाती है होली, 43 क्रांतिकारियों की जिद से जन्मी ये परंपरा आज भी जारी

कानपुर। देशभर में होली का पर्व अब संपन्न हो चुका है और ज्यादातर जगहों पर रंगों की खुमारी भी उतरने लगी है, लेकिन कानपुर में अभी भी होली का उत्सव थमा नहीं है। यहां परंपरा के अनुसार होली सात दिनों तक खेली जाती है और अनुराधा नक्षत्र के दिन आयोजित होने वाले ऐतिहासिक गंगा मेला के साथ इस पर्व का समापन होता है। सदियों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा के पीछे अंग्रेजी हुकूमत के दौर में 43 क्रांतिकारियों की जिद और आजादी की भावना से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी छिपी है, जिसने इस उत्सव को कानपुर की खास पहचान बना दिया है

यह बात उन दिनों की है जब भारत अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी में जकड़ा हुआ था। उस समय अंग्रेज होली को गंदगी फैलाने वाला त्योहार मानते थे और इसे पसंद नहीं करते थे। बताया जाता है कि एक दिन अंग्रेजों की एक टुकड़ी कानपुर के हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क से गुजर रही थी। तभी एक क्रांतिकारी ने उन पर रंगों की बौछार कर दी। इस घटना से तिलमिलाए कलेक्टर ने होली खेल रहे लोगों को गिरफ्तार करने के आदेश दे दिए। इसके बाद जागेश्वर त्रिवेदी, गुलाबचंद सेठ, हामीद खान, विश्वनाथ मल्होत्रा समेत 43 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इन गिरफ्तारियों के विरोध में शहर के लोगों ने बाजार बंद कर दिए और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ होली खेलकर अपना गुस्सा जाहिर किया। सात दिन तक जेल में रखने के बाद आखिरकार अंग्रेजों को सभी क्रांतिकारियों को रिहा करना पड़ा। रिहाई की खुशी में लोगों ने हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क से होली खेलते हुए विजय जुलूस निकाला, जो सरसैया घाट स्थित गंगा किनारे पहुंचा। वहां होली मिलन समारोह के साथ इस आयोजन का समापन किया गया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है और होली के बाद अनुराधा नक्षत्र के दिन इस पर्व का समापन किया जाता है।

हटिया मेला महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र विश्नोई ने सोमवार को बताया कि इस परंपरा को अब 85 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस वर्ष मंगलवार को गंगा मेला का आयोजन किया जाएगा। सर्वप्रथम हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क में जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त द्वारा झंडा फहराया जाएगा और क्रांतिकारियों को नमन किया जाएगा।

इसके बाद होलियारे भैंसा ठेला पर सवार होकर जनरलगंज बाजार, मेस्टन रोड, चौक और कोतवाली होते हुए वापस रज्जन बाबू पार्क पहुंचेंगे, जहां इसका समापन होगा। शाम को सरसैया घाट पर आयोजित गंगा मेला में लोग एक-दूसरे को गले मिलकर होली की बधाई देंगे।

इसके अलावा कमेटी की ओर से इस त्योहार को और भी रोमांचक बनाने के लिए बिरहाना रोड पर मटकी फोड़ का आयोजन भी किया जाता है। इसमें होलियारे पहुंचकर मटकी फोड़ते हैं और कपड़ा फाड़ होली भी खेलते हैं। सदियों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा की वजह से औद्योगिक नगरी कानपुर को होली के त्योहार के लिए देशभर में एक अलग पहचान मिली है।

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