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India Petroleum Reserves: अगर अचानक तेल संकट आ गया तो भारत कितने दिन तक टिक पाएगा? देश में कितने दिन का है डीजल-पेट्रोल, जानें

नेशनल डेस्क: भारत ने वैश्विक उथल-पुथल और युद्ध जैसी स्थितियों से निपटने के लिए अपना सुरक्षा कवच मजबूत कर लिया है। राज्यसभा में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और आश्वस्त करने वाली जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अगर आज दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाए या कोई बड़ा संकट खड़ा हो जाए, तब भी भारत के पास इतना स्टॉक मौजूद है कि देश की गाड़ी अगले 74 दिनों तक बिना किसी रुकावट के दौड़ती रहेगी।

दुनिया की नजरें भारत पर: तेल का बड़ा बाजार और दमदार रिफाइनरी
भारत अब केवल तेल खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह इस सेक्टर में एक ग्लोबल पावरहाउस बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के दम पर मंत्री ने साफ किया कि भारत कच्चे तेल के इस्तेमाल में दुनिया में तीसरे नंबर पर है। लेकिन खास बात यह है कि हमारे पास तेल को साफ करने (रिफाइनिंग) की अद्भुत क्षमता है, जिसमें हम दुनिया में चौथे स्थान पर हैं।

वर्तमान में भारत हर साल करीब 26 करोड़ मीट्रिक टन तेल को रिफाइन कर रहा है, जिसे जल्द ही बढ़ाकर 32 करोड़ मीट्रिक टन करने की योजना है। इतना ही नहीं, भारत पेट्रोलियम उत्पादों को दूसरे देशों में भेजने (निर्यात) के मामले में भी दुनिया के टॉप 5 देशों में शामिल है।

कहां छिपा है यह ‘खजाना’ और क्या है भविष्य की तैयारी?
अचानक आने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए सरकार ने जमीन के नीचे खास ‘रणनीतिक भंडार’ (Strategic Reserves) बनाए हैं। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तीन अलग-अलग ठिकानों पर करीब 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल जमा करने की व्यवस्था की है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से किसी भी देश के पास 90 दिनों का स्टॉक होना चाहिए, लेकिन हरदीप सिंह पुरी का मानना है कि वर्तमान में 74 दिनों का बैकअप भी भारत को एक बेहद सुरक्षित स्थिति में रखता है। सरकार की कोशिश आने वाले समय में इस क्षमता को और बढ़ाने की है ताकि भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव या युद्ध का असर भारतीय नागरिकों की जेब और देश की रफ्तार पर न पड़े।

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