वन विभाग एवं एनजीओ अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन द्वारा ग्राम पीपरछेड़ी में मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने व्यापक जन-जागरूकता अभियान

लोकनृत्य, चित्रकला व वृक्षारोपण से ग्रामीणों को जोड़ा गया
“मानव जीवन की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता” — शशिगानन्द
छुरा :- छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा गरियाबंद वनमंडल अंतर्गत मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा ग्रामीणों में सतत जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से विशेष जन-जागरूकता अभियान संचालित किया गया। अभियान का मुख्य लक्ष्य मानव जीवन की रक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित करना रहा।
इस कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को गरियाबंद वनमंडल के परिक्षेत्र पांडुका, उपवन परिक्षेत्र पिपरछेडी मे किया गया , जहाँ ग्रामीणों को वन्यजीवों से संभावित खतरों, सुरक्षा उपायों, संघर्ष की स्थिति में अपनाए जाने वाले व्यवहारिक कदमों तथा शासन की मुआवजा योजनाओं की विस्तृत जानकारी एक्सपर्ट द्वारा दी गई।
अभियान को प्रभावी और जनसुलभ बनाने के लिए कला चित्रों, पोस्टर व पेंटिंग के माध्यम से संदेश प्रसारित किया गया, वहीं लोकनृत्य प्रस्तुतियों के ज़रिये सरल भाषा में जागरूकता का संदेश दिया गया। इन नवाचारों के चलते ग्रामीणों की सहभागिता उल्लेखनीय रही और कार्यक्रम जनआंदोलन का रूप लेता नजर आया।
अभियान में ‘अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन’ (Earth Retreat Foundation) एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने जनसंपर्क, प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। एनजीओ की फाउंडर श्रीमती अनुभा द्वारा ग्रामीणों को विशेष रूप से खुले कुओं, जल स्रोतों व खतरनाक स्थानों को सुरक्षित करने, किसी भी वन्यजीव गतिविधि की तत्काल सूचना वन विभाग को देने तथा दुर्घटना या हमले की स्थिति में उपलब्ध शासकीय मुआवजा प्रावधानों की जानकारी, फूल से धूप बनाने की प्रक्रिया, दोना पत्तल बनाने का प्रशिक्षण दिया ।
पर्यावरण संरक्षण के संदेश को सशक्त करने हेतु कार्यक्रम के दौरान एनजीओ द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया, जिसमें अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने पौधारोपण कर वन-संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वनमंडल अधिकारी शशिगानन्द, विशेष अतिथि जनपद अध्यक्ष मीरा ठाकुर तथा विशिष्ट अतिथि ‘अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन’ की फाउंडर अनुभा द्विवेदी उपस्थित रहीं।
अपने संबोधन में वनमंडल अधिकारी शशिगानन्द ने कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“मानव जीवन की सुरक्षा एवं वन्यजीव संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि वन सुरक्षित रहेंगे तो पर्यावरण और मानव जीवन दोनों सुरक्षित रहेंगे।”
उन्होंने ग्रामीणों से खुले कुओं एवं जल स्रोतों को सुरक्षित करने, जंगल में सतर्कता बरतने तथा किसी भी वन्यजीव गतिविधि की तुरंत सूचना विभाग को देने की अपील की। साथ ही बताया कि शासन द्वारा जन-धन हानि की स्थिति में मुआवजा की व्यवस्था है और विभाग निरंतर गांव-गांव जाकर योजनाओं की जानकारी पहुंचा रहा है।
अंत में श्रीमती अनुभा ने कहा—
“सशक्त समुदाय ही सुरक्षित जीवन और संरक्षित वन की कुंजी है। वन विभाग और ग्रामीणों के आपसी सहयोग से ही मानव–वन्यजीव संघर्ष की समस्या का स्थायी समाधान संभव है जिसमे एनजीओ का पूर्ण समर्थन रहेगा।”
कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी, डिप्टी रेंजर सहित विभागीय अमला एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।





