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मोदी और मर्ज की वार्ता से मिली यूरोप की एशिया नीति को नई दिशा

अहमदाबाद।प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चांसलर मर्ज को जर्मन मर्सिडीज कार में साथ ले जाना भी साधारण घटना नहीं थी। यह एक प्रतीकात्मक संदेश था कि भारत आधुनिकता, तकनीक और वैश्विक मानकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।

अहमदाबाद की ठंडी सुबह जब साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज नतमस्तक हुए, तभी स्पष्ट हो गया था कि यह दौरा गहरे रणनीतिक संकेत देने वाला है। जर्मन चांसलर की यह यात्रा भारत जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्षों को एक नई दिशा देने वाली साबित हुई।

गांधी आश्रम में श्रद्धांजलि के बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का उद्घाटन हुआ। खुले वाहन में साथ बैठकर मोदी और मर्ज का शहर भ्रमण और फिर पतंग उड़ाना प्रतीकों से भरा दृश्य था। यह सांस्कृतिक आत्मीयता के साथ साथ राजनीतिक संदेश भी था कि भारत और जर्मनी केवल सम्मेलन कक्षों में नहीं बल्कि जनता और परंपराओं के बीच भी साझेदारी को जीना चाहते हैं।

वहीं गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में हुई औपचारिक वार्ता में दोनों देशों ने व्यापक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती देने, आतंकवाद से निपटने, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, हाइड्रोजन मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कौशल विकास और उच्च शिक्षा में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने स्पष्ट लक्ष्य तय किए।

भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब पचास अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है तथा इसे और तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस समय दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां भारत में सक्रिय हैं और जर्मनी भारत को यूरोप में अपने सबसे भरोसेमंद आर्थिक साझेदारों में देख रहा है। भारतीय कंपनियों के लिए भी जर्मनी को यूरोपीय बाजार का प्रवेश द्वार माना जा रहा है।चांसलर मर्ज ने भारत के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की इच्छा स्पष्ट रूप से जताई। देखा जाये तो बदलते वैश्विक हालात में जर्मनी अपनी ऊर्जा और रक्षा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। भारत के साथ रक्षा उत्पादन, सैन्य प्रशिक्षण और रणनीतिक संवाद को मजबूत करना इसी दिशा में एक कदम है। साथ ही जर्मनी भारत को हिंद प्रशांत क्षेत्र में एक स्थिरता कारक के रूप में देखता है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चांसलर मर्ज को जर्मन मर्सिडीज कार में साथ ले जाना भी साधारण घटना नहीं थी। यह एक प्रतीकात्मक संदेश था कि भारत आधुनिकता, तकनीक और वैश्विक मानकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। यह संदेश जर्मन उद्योग जगत और यूरोपीय निवेशकों के लिए भी था कि भारत अब केवल एक उभरता बाजार नहीं बल्कि एक विश्वसनीय साझेदार है। वहीं दोनों नेताओं का पतंग उड़ाने का दृश्य भी गहरे अर्थ लिए हुए था। दो नेताओं का एक साथ पतंग उड़ाना इस बात का संकेत माना गया कि वह वैश्विक राजनीति के आसमान में अपनी साझेदारी की पतंग ऊंची रखना चाहते हैं और उन ताकतों की पतंग काटने का इरादा रखते हैं जो नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करती हैं। यह संदेश अप्रत्यक्ष रूप से उन देशों के लिए भी था जो आक्रामक विस्तारवाद और दबाव की राजनीति में विश्वास रखते हैं।

भारत और जर्मनी के बीच हुए ये समझौते केवल द्विपक्षीय लाभ तक सीमित नहीं हैं बल्कि इनके दूरगामी सामरिक प्रभाव हैं। यह साझेदारी यूरोपीय संघ के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि भारत अब यूरोप की एशिया नीति का केंद्र बनता जा रहा है। यदि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता आगे बढ़ता है, तो इसका सबसे बड़ा आधार भारत जर्मनी संबंध ही बनेंगे। इससे यूरोप की आर्थिक निर्भरता चीन पर कम हो सकती है और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता भी आएगी।जर्मनी यूरोपीय संघ की आर्थिक धुरी माना जाता है। ऐसे में भारत के साथ उसके गहरे रिश्ते पूरे यूरोप की रणनीतिक सोच को प्रभावित करेंगे। हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण में भारत जर्मनी सहयोग यूरोप को नई दिशा दे सकता है।

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