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अदानी ग्रुप ने छोड़ा FMCG बिजनेस: विलमार इंटरनेशनल बनेगी AWL एग्री बिजनेस की बहुमत मालिक

अदानी का बड़ा फैसला: एफएमसीजी से पूरी तरह बाहर, अब विलमार संभालेगी ‘फॉर्च्यून’ का कारोबार!-भारत के व्यापार जगत में आजकल एक ज़ोरदार हलचल मची हुई है! देश का जाना-माना अदानी ग्रुप अब अपने एफएमसीजी यानी फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स वाले कारोबार से पूरी तरह नाता तोड़ने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद, सिंगापुर की जानी-मानी कंपनी विलमार इंटरनेशनल इस पूरे सेगमेंट की कमान संभालेगी। जब यह डील पूरी हो जाएगी, तो AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड, जिसे पहले अडानी विलमार लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, उसका मालिकाना हक़ पूरी तरह से विलमार के हाथों में चला जाएगा। यह वाकई एक बड़ा बदलाव है जो भारतीय बाजार में नए समीकरण बना सकता है।

 अदानी से विलमार तक का पूरा खेल: एक विस्तृत नज़र-इस पूरे सौदे की कहानी बड़ी दिलचस्प है। अदानी ग्रुप ने पिछले साल जुलाई 2025 में ही यह घोषणा कर दी थी कि वे AWL एग्री बिजनेस में अपनी 20% हिस्सेदारी सिंगापुर की विलमार इंटरनेशनल को बेच देंगे। इस बड़ी डील के लिए लगभग 7,150 करोड़ रुपये की कीमत तय की गई थी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब अदानी ग्रुप इस कारोबार से अपनी हिस्सेदारी बेच रहा है। इससे पहले, इसी साल जनवरी में भी अदानी ग्रुप ने 13.51% हिस्सेदारी बेचकर लगभग 4,855 करोड़ रुपये जुटाए थे। वर्तमान में, अदानी ग्रुप की सहायक कंपनी ACL, जिसके पास 30.42% हिस्सेदारी है, उसमें से 20% हिस्सा विलमार को बेचा जा चुका है। बाकी बची हुई 10.42% हिस्सेदारी भी जल्द ही बेच दी जाएगी। इस तरह, अदानी ग्रुप एफएमसीजी सेक्टर से पूरी तरह बाहर निकल जाएगा और अपना सारा ध्यान और संसाधन अपने मुख्य व्यवसायों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित करेगा। यह रणनीतिक कदम कंपनी को अपने मूल क्षेत्रों में और मज़बूती प्रदान करेगा।

विलमार इंटरनेशनल: एशिया की एक दिग्गज एग्रीबिजनेस कंपनी-विलमार इंटरनेशनल, जिसका मुख्यालय खूबसूरत सिंगापुर में है, एशिया की सबसे बड़ी एग्रीबिजनेस कंपनियों में से एक के तौर पर जानी जाती है। वर्ष 1991 में स्थापित हुई इस कंपनी की भारत में पहले सीधी व्यापारिक उपस्थिति नहीं थी। लेकिन अब AWL एग्री बिजनेस और श्री रेणुका शुगर (SRS) जैसी कंपनियों के ज़रिए, विलमार ने भारतीय बाज़ार में अपनी एक मज़बूत पकड़ बना ली है। AWL एग्री बिजनेस भारत में ‘फॉर्च्यून’ जैसे लोकप्रिय ब्रांड के तहत खाद्य तेल और अन्य कई तरह के खाद्य उत्पाद बेचती है। इस डील के अंतिम रूप लेने के बाद, भारत में विलमार की हिस्सेदारी बढ़कर 64% हो जाएगी, जिससे वह इस कंपनी की बहुमत मालिक बन जाएगी। यह कदम विलमार के लिए भारत के तेजी से बढ़ते एफएमसीजी और एग्री सेक्टर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी कई मायनों में अहम हो सकता है।

 अदानी ग्रुप का एफएमसीजी से एग्जिट: क्या है इसके पीछे की वजह?-अदानी ग्रुप ने दिसंबर 2024 में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे एफएमसीजी व्यवसाय से हटकर पूरी तरह से अपने इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत, ग्रुप ने धीरे-धीरे अपनी कुल 44% हिस्सेदारी बेच दी है। इस पूरे सौदे से अदानी ग्रुप को 15,700 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा की रकम मिलने की उम्मीद है। यह फैसला अदानी ग्रुप के लिए एक बहुत ही रणनीतिक कदम है। अब कंपनी अपनी ऊर्जा और निवेश को ग्रीन एनर्जी, पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में और अधिक मज़बूती से लगाना चाहती है। दूसरी ओर, विलमार इंटरनेशनल के लिए यह डील भारत में एक लंबी अवधि के लिए एक मज़बूत व्यापारिक आधार तैयार करेगी, जिससे वह भारतीय बाज़ार में अपनी स्थिति को और बेहतर बना सकेगी।

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