
ड्रीम11 का जलवा और अचानक आया तूफान: क्या है पूरा मामला?
ड्रीम11: फैंटेसी लीग का बेताज बादशाह-जब भी क्रिकेट की दुनिया में फैंटेसी लीग की बात होती थी, तो एक ही नाम ज़हन में आता था – ड्रीम11। चाहे वो इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) हो, या फिर कोई घरेलू या अंतरराष्ट्रीय मैच, ड्रीम11 ने हर जगह अपनी धाक जमा ली थी। इतना ही नहीं, भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर भी इसी कंपनी का लोगो शान से लहराता था। ऐसा लगता था मानो फैंटेसी गेमिंग की दुनिया में ड्रीम11 का ही राज चलेगा। लेकिन, हाल ही में आए नए ऑनलाइन गेमिंग कानून ने इस पूरे खेल का पासा ही पलट दिया। अब ‘रियल मनी गेम्स’ यानी ऐसे खेल जिनमें असली पैसों का दांव लगता है, उनके विज्ञापनों और प्रमोशन पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई है। इस एक फैसले ने न सिर्फ ड्रीम11 जैसी बड़ी कंपनियों को तगड़ा झटका दिया है, बल्कि क्रिकेटरों की कमाई पर भी सीधा असर डाला है। पहले जहाँ ब्रांडिंग और स्पॉन्सरशिप से करोड़ों की कमाई हो जाती थी, अब वो रास्ते लगभग बंद हो गए हैं।
जब सितारों पर गिरी गाज: क्रिकेटरों की कमाई का क्या हुआ?-क्रिकेट के सितारे अपनी लोकप्रियता और मैदान पर उनके प्रदर्शन के दम पर अलग-अलग ब्रांड्स के साथ जुड़ते हैं। विराट कोहली जैसे खिलाड़ी MPL का चेहरा थे, तो वहीं महेंद्र सिंह धोनी Winzo के साथ जुड़े हुए थे। रोहित शर्मा, केएल राहुल, जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत और पांड्या बंधुओं जैसे कई बड़े नाम ड्रीम11 के प्रमोशन से जुड़े थे। इन खिलाड़ियों की सालाना कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्रांडिंग और विज्ञापनों से आता था, जो लाखों-करोड़ों में होता था। क्रिकबज की एक रिपोर्ट के अनुसार, विराट कोहली को हर साल इन विज्ञापनों से करीब 10 से 12 करोड़ रुपये मिलते थे। महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों की कमाई 6 से 7 करोड़ रुपये सालाना थी। वहीं, जो युवा और कम मशहूर खिलाड़ी थे, उन्हें भी लगभग 1 करोड़ रुपये तक मिल जाते थे। लेकिन नए कानून के लागू होते ही इन सभी अनुबंधों को रद्द कर दिया गया है। ऐसे में, सबसे ज्यादा मार विराट कोहली जैसे बड़े सितारों पर पड़ी है, जिनकी कमाई का एक बड़ा जरिया अचानक बंद हो गया है।
सिर्फ खिलाड़ी नहीं, पूरा बाज़ार हिल गया: कितना बड़ा है नुकसान?-इस नए कानून का असर केवल क्रिकेटरों की जेब तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे विज्ञापन और गेमिंग उद्योग को हिलाकर रख दिया है। रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय क्रिकेटरों को हर साल लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। वहीं, अगर विज्ञापन इंडस्ट्री की बात करें तो इस पर करीब 7 से 8 हजार करोड़ रुपये का बुरा असर पड़ा है। अचानक से प्रमोशन और विज्ञापनों पर लगी रोक के कारण कई गेमिंग कंपनियां तो बंद होने की कगार पर पहुँच गई हैं। जहाँ पहले ये कंपनियां स्पॉन्सरशिप और प्रमोशन पर पानी की तरह पैसा बहा रही थीं, वहीं अब सब कुछ थम सा गया है। इस एक फैसले ने क्रिकेट के मैदान के बाहर भी एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। यह साफ है कि इस नए कानून ने न केवल खिलाड़ियों की कमाई पर कैंची चलाई है, बल्कि पूरे विज्ञापन बाजार को भी गहरा घाव दिया है।



