
शिक्षक पढ़ाएँ या राशन बाँटें? बलरामपुर में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल-यह सवाल बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र से उठ रहा है जहाँ प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय राशन वितरण का काम सौंप दिया गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और इस फैसले से बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
शिक्षकों का विरोध: पढ़ाने की जगह राशन वितरण?-शिक्षकों में इस फैसले से काफी नाराज़गी है। शिक्षक संघ ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि शिक्षकों की नियुक्ति बच्चों को पढ़ाने के लिए होती है, न कि सरकारी योजनाओं में मदद करने के लिए। उनका कहना है कि यह शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है और उन्होंने प्रशासन से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे आंदोलन करने की चेतावनी भी दे रहे हैं।
प्रशासन का दावा: आदेश में हुआ संशोधन-इस पूरे मामले पर वाड्रफनगर की एसडीएम नीर निधि नांदेहा का कहना है कि राशन वितरण के लिए शिक्षकों को लगाए जाने के आदेश में संशोधन कर दिया गया है। लेकिन कई शिक्षकों को अभी तक इस बारे में कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है जिससे स्थिति अभी भी साफ नहीं है। कई शिक्षक अभी भी असमंजस में हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर-शिक्षकों के पास पहले से ही कई काम हैं जैसे मध्याह्न भोजन योजना, परीक्षाओं का मूल्यांकन और नए बच्चों का नामांकन। अगर उन्हें और काम सौंप दिए जाएँगे तो बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा। यह न सिर्फ अनुचित है बल्कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी जो पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
पुरानी गलती का दोहराव?-यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों में लगाया गया हो। पहले भी चुनाव, जनगणना, टीकाकरण और सरकारी योजनाओं के प्रचार में शिक्षकों की मदद ली जाती रही है। लेकिन अब जब स्कूल शुरू हो चुके हैं, तो शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। क्या प्रशासन शिक्षा को लेकर अपनी प्राथमिकताएँ भूलता जा रहा है?




