
एकता का प्रतीक: सर्वधर्म गोष्ठी- यह गोष्ठी सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की एकता और अखंडता का एक शानदार उदाहरण थी। राजभवन में हुए इस आयोजन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें किसी खास धर्म की बात नहीं, बल्कि उस साझा भावना की चर्चा हुई जो भारत को एक सूत्र में पिरोती है। यह गोष्ठी साबित करती है कि जब देश की बात आती है, तो धर्म, जाति या मतभेद मायने नहीं रखते, हम सब एक हैं।
धर्मों का एक ही संदेश: मानवता और शांति- गोष्ठी में राज्यपाल ने बहुत ही सरल शब्दों में बताया कि सभी धर्मों का मूल एक ही है – मानवता, करुणा और शांति। हिन्दू धर्म का ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’, सिख धर्म की ‘एकम’ भावना, बुद्ध का ‘अपने दीपक खुद बनो’ का संदेश, जैन धर्म का ‘अहिंसा परमो धर्मः’, इस्लाम का ‘विभाजन मत करो’ और ईसाई धर्म का शांति का संदेश – ये सब एक ही लक्ष्य की ओर इशारा करते हैं: मिलजुल कर शांति और प्रेम से जीना। आज के दौर में, जब चारों तरफ बंटवारे की कोशिशें हो रही हैं, इन शिक्षाओं को अपनाना बेहद ज़रूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर: बेटियों का साहस और देशभक्ति- राज्यपाल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी ज़िक्र किया, जिसमे हमारी सेना आतंकवाद का डटकर मुकाबला कर रही है। ख़ास बात यह है कि इस लड़ाई में बेटियाँ भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह जैसी बहादुर महिलाएँ देश को प्रेरणा दे रही हैं। वे सिर्फ़ सूचना नहीं दे रही हैं, बल्कि यह भी दिखा रही हैं कि अगर इरादा मज़बूत हो, तो कोई भी चुनौती पार की जा सकती है। ये कहानियाँ भारत की ताकत को दर्शाती हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
धर्म और न्याय का इतिहास: भारत का संकल्प- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि देश के हर संकट में, भारतवासियों ने धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर एकता दिखाई है। यह हमारी परंपरा और ताकत है। वेदों का संदेश भी यही है – ‘एक मन, एक विचार, एक लक्ष्य’। धर्म का मकसद समाज में प्रेम और सौहार्द फैलाना है, न कि भेदभाव। भगवान राम से लेकर गुरु गोविंद सिंह तक, सभी ने प्रेम, न्याय और सत्य को सर्वोपरि रखा। अधर्म के खिलाफ़ खड़ा होना हमारा कर्तव्य है।
उत्तराखंड: वीरता और देशभक्ति की भूमि- मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की वीरता और बलिदानों का भी उल्लेख किया। यहाँ के जवानों ने हर युद्ध में देश का नाम रोशन किया है। कारगिल से लेकर सीमाओं की रक्षा तक, उत्तराखंड के वीरों ने हमेशा आगे बढ़कर काम किया है। अब हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनके साथ खड़े रहें। यह सिर्फ़ सेना की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है – देश की एकता, शांति और उन ताकतों के खिलाफ़ लड़ने की जो हमें तोड़ना चाहती हैं। उत्तराखंड की जनता का यह जज़्बा आज भी कायम है।






