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एमपी में लंपी वायरस का खतरा: पशुपालकों में बढ़ी चिंता

लंपी वायरस का बढ़ता खतरा: मध्य प्रदेश में फिर दस्तक, पशुपालकों में बढ़ी दहशत!

क्या है लंपी वायरस और क्यों है चिंता का विषय?-लंपी वायरस, जिसे एलएसडीडी (Lumpy Skin Disease) भी कहा जाता है, एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से मवेशियों को प्रभावित करता है। यह वायरस मक्खियों, मच्छरों और चिचड़ी जैसे कीड़ों के काटने से फैलता है। संक्रमित पशुओं में बुखार, त्वचा पर गांठें और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मध्य प्रदेश के रतलाम और छिंदवाड़ा जिलों में इसके नए मामले सामने आने के बाद पशुपालन विभाग और किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

पशुपालन विभाग का एक्शन प्लान: टीकाकरण और जागरूकता-संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए, मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने राज्य भर में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है और लगभग 25,000 वैक्सीन की खुराक उपलब्ध कराई है। इसका मुख्य उद्देश्य वायरस के प्रसार को नियंत्रित करना और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। किसानों को भी लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य करवाएं।

पशुपालकों के लिए ज़रूरी सावधानियां और सलाह–पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को अपने मवेशियों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी है। इसमें बाड़ों में मच्छर और मक्खी रोधी दवाओं का छिड़काव करना, तथा नीम की पत्तियों और गूगल का धुआं करना शामिल है। यदि किसी पशु में लंपी वायरस के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तत्काल पशुपालन विभाग को सूचित करने की सलाह दी गई है, ताकि समय पर उपचार और रोकथाम के उपाय किए जा सकें।

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