
शेयर बाज़ार में लौटी रौनक: सेंसेक्स-निफ्टी की मज़बूत शुरुआत, निवेशकों को मिली राहत!
बाज़ार में आई तेज़ी, क्या है वजह?-शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में दो दिनों की लगातार गिरावट के बाद एक राहत भरी सुबह देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने ही अच्छी मज़बूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 197 अंकों से ज़्यादा उछलकर 80,277 के स्तर पर पहुँच गया, वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 63 अंकों की बढ़त के साथ 24,564 के पार कारोबार करता दिखा। जानकारों का मानना है कि यह उछाल मुख्य रूप से निचले स्तरों पर हुई वैल्यू बाइंग यानी सस्ते दाम पर शेयरों की खरीदारी की वजह से आया है। पिछले दो दिनों की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों ने मौका देखकर अच्छे स्टॉक्स को खरीदा, जिससे बाज़ार में थोड़ी जान आई और निवेशकों के चेहरों पर मुस्कान लौटी। अब यह देखना अहम होगा कि यह तेज़ी कब तक बनी रहती है या यह महज़ एक छोटी सी उछाल साबित होती है।
कौन चमके, कौन फिसले: शेयरों का हाल-शुक्रवार को बाज़ार की शुरुआती चाल में कुछ कंपनियों ने तो कमाल कर दिया, वहीं कुछ को थोड़ी निराशा हाथ लगी। सेंसेक्स की बात करें तो हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे बड़े नाम बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इन दिग्गज कंपनियों में निवेशकों का भरोसा देखकर अच्छी खरीदारी हुई। वहीं दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, इटर्नल और इंफोसिस जैसे बड़े शेयर शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ दिखे। बाज़ार के जानकारों का कहना है कि आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर अभी भी दबाव बना हुआ है, इसी वजह से इन शेयरों में बिकवाली देखी जा रही है। हाल के दिनों में बाज़ार में जो उतार-चढ़ाव और वैश्विक संकेतों की अनिश्चितता रही है, उसका असर इन कंपनियों के शेयरों पर साफ तौर पर दिख रहा है।
पिछली गिरावट का असर और आगे की रणनीति-गुरुवार को शेयर बाज़ार में काफी बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स 705 अंकों से ज़्यादा टूटकर 80,080 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी 211 अंकों से ज़्यादा लुढ़ककर 24,500 के स्तर पर आ गया था। पिछले दो दिनों में तो सेंसेक्स करीब 1.90% यानी 1,555 अंक तक गिर चुका था। इस लगातार गिरावट ने निवेशकों के मन में थोड़ी घबराहट पैदा कर दी थी। कई लोगों ने कम समय के मुनाफे को बुक करते हुए अपने पोर्टफोलियो में बदलाव भी किया। हालाँकि, शुक्रवार की इस हल्की बढ़त से बाज़ार में कुछ स्थिरता आई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि फिलहाल निवेशकों को थोड़ा सब्र रखना चाहिए और बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए। केवल उन्हीं चुनिंदा कंपनियों में निवेश करें जिनके फंडामेंटल मज़बूत हों।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की उम्मीदें-बाज़ार के इन उतार-चढ़ावों के बीच सरकार की ओर से एक अच्छी खबर आई है। भारत अब अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर फिर से बातचीत शुरू करने की तैयारी कर रहा है। एक बड़े सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस समझौते में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि अमेरिका भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% आयात शुल्क को कम करवाए। अगर यह समझौता सफल होता है, तो यह भारतीय उद्योगों के लिए बहुत बड़ी राहत की बात होगी। फिलहाल बातचीत की कोई नई तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन सरकार इस मुद्दे को बहुत अहमियत दे रही है। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इस तरह की सकारात्मक खबरें निवेशकों का हौसला बढ़ाती हैं और लंबे समय में इसका शेयर बाज़ार पर अच्छा असर पड़ सकता है।
एशियाई और अमेरिकी बाज़ारों का मिला-जुला रुख-अगर हम दुनिया भर के बाज़ारों की बात करें, तो शुक्रवार को एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला असर देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई 225 तो गिरावट में थे, लेकिन वहीं शंघाई का एसएसई कॉम्पोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हैंगसेंग हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। दूसरी तरफ, अमेरिकी बाज़ारों ने गुरुवार को अच्छी मजबूती दिखाई थी और वहां के इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए थे। इसका असर भारतीय निवेशकों को भी मिला, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिली। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में भी 0.66% की गिरावट आई और ब्रेंट क्रूड 68.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में यह कमी भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार, दोनों के लिए एक अच्छी खबर है।
विदेशी और घरेलू निवेशकों की चाल-शेयर बाज़ार में विदेशी और घरेलू निवेशकों की चाल भी बहुत मायने रखती है। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में करीब 3,856 करोड़ रुपये की बिकवाली की। वहीं, दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को संभालने की कोशिश करते हुए करीब 6,920 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे यह साफ है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों ने बाज़ार को गिरने से बचाने का काम किया। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, तब तक बाज़ार में बहुत बड़ी तेज़ी की उम्मीद करना मुश्किल है। हालाँकि, घरेलू निवेशकों की तरफ से लगातार हो रही खरीदारी एक सकारात्मक संकेत है और इससे बाज़ार को सहारा मिल सकता है।




