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सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट: विदेशी निवेशकों की बिकवाली और H-1B वीजा शुल्क ने बढ़ाई टेंशन

 शेयर बाज़ार में क्यों आई गिरावट? विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी नीतियों का असर

बाजार में उथल-पुथल: लगातार पांचवें दिन गिरावट का सिलसिला-भारतीय शेयर बाज़ार में इन दिनों कुछ खास रौनक नहीं दिख रही है। लगातार पाँच दिनों से, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही गिरावट के साथ खुल रहे हैं, जिससे निवेशकों के मन में थोड़ी चिंता बनी हुई है। ऐसा लगता है मानो बाज़ार में थोड़ी सुस्ती छा गई है। इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना और अमेरिका की H-1B वीज़ा से जुड़ी नई फीस को लेकर बनी अनिश्चितता। इन सब बातों ने मिलकर बाज़ार में एक अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, और निवेशक थोड़ा संभलकर कदम रख रहे हैं।

सुबह-सुबह बाज़ार में क्यों आई नरमी?-गुरुवार की सुबह भी कुछ ऐसी ही रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 141 अंक लुढ़क कर 81,574.31 पर खुला, वहीं निफ्टी भी 22 अंकों की कमी के साथ 25,034.50 पर खुला। यह लगातार पाँचवां दिन था जब घरेलू बाज़ार दबाव में दिखा। ऐसा क्यों हो रहा है? इसके पीछे मुख्य कारण वैश्विक बाज़ारों से मिले कमजोर संकेत और विदेशी फंडों का लगातार बाहर जाना है। इन सबने मिलकर निवेशकों के भरोसे को थोड़ा डगमगा दिया है। पिछले चार दिनों में ही सेंसेक्स 1,298 अंकों से ज़्यादा गिर चुका है, और निफ्टी में भी करीब 367 अंकों की गिरावट आई है। यह दिखाता है कि बाज़ार में थोड़ी घबराहट का माहौल है।

कौन से शेयर हुए सबसे ज़्यादा कमजोर?-इस गिरावट के दौर में, सेंसेक्स के कुछ बड़े और जाने-माने शेयर भी पीछे नहीं रहे। टाटा मोटर्स, एशियन पेंट्स, टाइटन, एचसीएल टेक और मारुति जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट देखी गई। हालांकि, कुछ शेयर जैसे आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एलएंडटी और इंफोसिस ने थोड़ी मजबूती दिखाई। यह मिला-जुला रुख यह बताता है कि इस समय निवेशक थोड़ा सतर्क हैं और ज़्यादातर लोग सुरक्षित निवेश की ओर ध्यान दे रहे हैं। वे ऐसे शेयरों में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं जिनमें कम जोखिम हो और स्थिरता बनी रहे।

विदेशी निवेशकों का बाहर जाना: एक बड़ी वजह-विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय शेयर बाज़ार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। बुधवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 2,425 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। यह सिलसिला इस साल लगातार जारी है, जिससे बाज़ार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत की आर्थिक सुधार की रफ्तार बनी रहती है और ब्याज दरें कम रहती हैं, तो भविष्य में विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाज़ार में पैसा लगा सकते हैं। उनकी वापसी बाज़ार के लिए एक बड़ी राहत लेकर आ सकती है।

अमेरिका की नीतियों का असर: बढ़ी अनिश्चितता-अमेरिकी नीतियों का भारतीय बाज़ार पर गहरा असर पड़ रहा है। खासकर, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ और नई H-1B वीज़ा फीस (1,00,000 डॉलर) ने बाज़ार की टेंशन को और बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर उन टेक कंपनियों पर पड़ सकता है जो अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। इसी वजह से, निफ्टी के लिए 25,300 का स्तर एक मजबूत रुकावट (रेजिस्टेंस) माना जा रहा है। यह दिखाता है कि इस स्तर को पार करना बाज़ार के लिए मुश्किल हो सकता है।

वैश्विक बाज़ार और कच्चे तेल का खेल-सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बाज़ार में थोड़ी हलचल है। एशियाई बाज़ारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स गिरावट में रहा, जबकि जापान का निक्केई, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग में हल्की बढ़त देखी गई। अमेरिकी बाज़ार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 0.43% गिरकर 69.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जिसका असर ऊर्जा सेक्टर पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा? बाज़ार की चाल का अनुमान-बाज़ार के जानकारों का मानना है कि भारत में हो रहे आर्थिक सुधार और मजबूत आर्थिक आधार लंबे समय में निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित होंगे। लेकिन फिलहाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता बाज़ार पर दबाव बनाए रख सकती है। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि निवेशकों को इस समय सोच-समझकर और लंबी अवधि की रणनीति बनाकर ही निवेश करना चाहिए। जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है।

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