
रुपये में हुआ उछाल: डॉलर की कमजोरी और शेयर बाजार ने दिया साथ-मंगलवार को रुपया 42 पैसे मजबूत होकर 85.34 प्रति डॉलर पर पहुँच गया। ये उछाल डॉलर के कमजोर होने और शेयर बाजार में तेजी की वजह से आया। विदेशी मुद्रा बाजार में दिन की शुरुआत 85.66 से हुई, लेकिन जल्दी ही ये 85.34 तक पहुँच गया।
ट्रम्प का फेड पर असर: डॉलर को लगा झटका-अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प के फेडरल रिजर्व की नीतियों में दखल देने की खबरों से डॉलर को झटका लगा। फेड चेयर पॉवेल को हटाने की चर्चाओं से निवेशक घबरा गए, और डॉलर इंडेक्स कई महीनों के निचले स्तर, 96.614 पर पहुँच गया। इसका असर दुनिया भर के करेंसी बाजारों पर दिखाई दिया।
तेल की कीमतों में गिरावट: भारत को राहत-ब्रेंट क्रूड की कीमतें 0.24% गिरकर 67.61 डॉलर प्रति बैरल हो गईं। इससे भारत का आयात बिल कम होगा और महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी। कम तेल की कीमतें रुपये के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती हैं।
शेयर बाजार में तेजी: रुपये को मिला सहारा-मंगलवार को शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 200.92 अंक चढ़कर 83,807.38 पर बंद हुआ, और निफ्टी 57.85 अंक बढ़कर 25,574.90 पर पहुँच गया। शेयर बाजार में इस सकारात्मक रुख ने रुपये की मजबूती में बड़ी भूमिका निभाई।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: लेकिन रुपया मजबूत-विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को 831.50 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, फिर भी रुपया मजबूत रहा। डॉलर की कमजोरी और तेल की कीमतों में गिरावट ने बिकवाली के असर को कम कर दिया।
उद्योगिक उत्पादन और वित्तीय घाटा: मिश्रित तस्वीर-मई 2025 में भारत का औद्योगिक उत्पादन 1.2% ही रहा, जो 9 महीनों में सबसे कम है। मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और पावर सेक्टर की सुस्ती और जल्दी मानसून की वजह से ये हुआ। लेकिन, केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा सालाना लक्ष्य का सिर्फ 0.8% रहा, जिसमें RBI से मिले ₹2.69 लाख करोड़ के डिविडेंड का बड़ा योगदान है।
क्या आगे और मजबूत होगा रुपया?-विशेषज्ञों का मानना है कि USDINR 85.20-85.40 के बीच मजबूत रहेगा। लेकिन, आने वाले दिनों में घरेलू आंकड़ों की कमजोरी और विदेशी निवेश की निकासी से ये 86-86.50 तक जा सकता है। फिलहाल, डॉलर की कमजोरी और शेयर बाजार की मजबूती रुपये के लिए सकारात्मक संकेत हैं।


