रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को मिला NHPC से 390 MW सोलर प्रोजेक्ट, भारत में क्लीन एनर्जी सेक्टर में बढ़त पक्की

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा धमाका: NHPC से मिला ₹4,000 करोड़ का सोलर प्रोजेक्ट!
रिलायंस के हाथ लगा सुनहरा मौका: NHPC से मिला 390 MW सोलर और BESS प्रोजेक्ट!-रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, जो कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक जाना-माना नाम है, ने हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सरकारी कंपनी NHPC (नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन) ने रिलायंस को 390 मेगावाट का सोलर पावर प्रोजेक्ट और साथ ही 780 मेगावाट-घंटे की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का कॉन्ट्रैक्ट सौंपा है। यह प्रोजेक्ट इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) से जुड़ा होगा, जिसका सीधा मतलब है कि इससे उत्पन्न होने वाली बिजली को सीधे राष्ट्रीय ग्रिड में भेजा जाएगा और देश के विभिन्न राज्यों में सप्लाई किया जा सकेगा। जब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से चालू हो जाएगा, तो यह रिलायंस ग्रुप के पोर्टफोलियो में लगभग 700 MWp की सोलर डीसी कैपेसिटी और 780 MWh की BESS कैपेसिटी को जोड़ देगा। इससे रिलायंस की क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में अपनी पकड़ और भी मजबूत होगी। सबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए जो टैरिफ तय किया गया है, वह केवल 3.13 रुपये प्रति यूनिट है, जो इसे भारत के सबसे किफायती और आकर्षक ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में से एक बनाता है। यह डील रिलायंस की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।
रिलायंस का क्लीन एनर्जी का बढ़ता कारवां: अब और भी मजबूत हुआ पोर्टफोलियो!-रिलायंस पावर, जो रिलायंस ग्रुप की एक प्रमुख लिस्टेड कंपनी है, पहले से ही रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी रही है। वर्तमान में, कंपनी के पास लगभग 2.5 GWp की सोलर पावर कैपेसिटी और 2.5 GWhr की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) कैपेसिटी मौजूद है। इस नए NHPC कॉन्ट्रैक्ट के जुड़ने से रिलायंस ग्रुप का कुल क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो काफी विस्तार हो गया है। अब कंपनी के पास कुल मिलाकर 3 GWp से अधिक की सोलर डीसी कैपेसिटी और 3.5 GWhr से अधिक की BESS कैपेसिटी हो गई है। इस तरह, रिलायंस भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन गई है जो इंटीग्रेटेड सोलर और BESS सेगमेंट में काम कर रही है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो न केवल रिलायंस के लिए बल्कि पूरे भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि देश के बड़े कॉर्पोरेट घराने अब बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और इसमें निवेश बढ़ा रहे हैं।
NHPC की धांसू टेंडर प्रक्रिया: 15 कंपनियों को पछाड़कर रिलायंस की जीत!-यह महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट NHPC द्वारा आयोजित की गई एक बड़ी टेंडर प्रक्रिया का परिणाम है। इस टेंडर का उद्देश्य 1,200 MW सोलर और 600 MW/2,400 MWh की BESS ISTS-कनेक्टेड प्रोजेक्ट्स के लिए बिडिंग कराना था। इस प्रक्रिया में कुल 15 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया, जिनमें से 14 कंपनियां ई-रिवर्स ऑक्शन के अंतिम दौर तक पहुंचीं। यह टेंडर लगभग 4 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय ऊर्जा बाजार में डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस की मांग कितनी अधिक है। रिलायंस ने इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में अपनी आक्रामक बिडिंग रणनीति का प्रदर्शन करते हुए इस कॉन्ट्रैक्ट को सफलतापूर्वक अपने नाम किया। यह जीत केवल कंपनी की मजबूत व्यावसायिक सोच का ही प्रमाण नहीं है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी की ओर लोगों और कंपनियों का रुझान कितनी तेजी से बढ़ रहा है और भविष्य में इसकी अपार संभावनाएं हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर में रिलायंस की मजबूत पकड़: अब ग्रीन एनर्जी में भी दबदबा!-रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की पहचान सिर्फ पावर सेक्टर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी भारत के कई बड़े और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी सक्रिय रूप से शामिल रही है। कंपनी ने अपने स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (SPVs) के माध्यम से पावर, रोड्स, मेट्रो रेल और डिफेंस जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। मुंबई मेट्रो प्रोजेक्ट इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे कंपनी ने BOOT (Build, Own, Operate, Transfer) मॉडल के तहत सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके अलावा, कंपनी ने कई महत्वपूर्ण रोड प्रोजेक्ट्स को भी BOT (Build, Operate, Transfer) आधार पर पूरा किया है। अब, सोलर और BESS प्रोजेक्ट्स के इस नए कॉन्ट्रैक्ट के साथ, रिलायंस की पकड़ ग्रीन एनर्जी मार्केट में और भी अधिक मजबूत हो गई है। यह कदम न केवल कंपनी को भविष्य में आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाएगा, बल्कि यह भारत के महत्वाकांक्षी एनर्जी ट्रांजिशन मिशन को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


