
दिल्ली में सरकारी कर्मचारियों का फ्री राशन घोटाला एक बड़ी खबर सामने आई है कि दिल्ली में 5621 सरकारी कर्मचारी मुफ्त राशन योजना का गलत तरीके से फायदा उठा रहे हैं। सरकार ने जब एक नई योजना, यूनिफाइड डेटा हब (UDH), के ज़रिए जाँच शुरू की तो ये बात सामने आई। इस योजना से पता लगाया जा रहा है कि क्या सही लोग ही सरकारी योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं या नहीं। जांच में पाया गया कि इन 5621 लोगों का डेटा, जो मुफ्त राशन पा रहे थे, सरकारी वेतन कार्यालय और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड्स से मिलता है। यानी ये लोग खुद सरकारी नौकरी करते हैं और नियमों के मुताबिक उन्हें ये राशन नहीं मिलना चाहिए था! और भी हैरान करने वाली बात है कि इनमें से 3072 कर्मचारियों की सालाना कमाई एक लाख रुपये से ज़्यादा है, फिर भी उन्होंने कम आय का सर्टिफिकेट बनवाया है। इससे वे और भी सरकारी योजनाओं का फायदा उठा पा रहे थे। 395 कर्मचारी तो अपने परिवार के मुखिया के तौर पर भी रजिस्टर हैं! अब आईटी विभाग ने इस मामले की रिपोर्ट बनाकर संबंधित विभागों को भेज दी है। इन लोगों को योजना से हटाया जाएगा, जो फायदा उठाया है वो वापस लिया जाएगा और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की जाएगी।
यूनिफाइड डेटा हब (UDH) क्या है? दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी योजनाओं के लिए एक ही डेटाबेस, यूनिफाइड डेटा हब (UDH), बनाया है। इससे ये पता चलता है कि कौन योजनाओं का फायदा उठा रहा है। इससे सरकार को ये भी पता चलेगा कि मदद किन इलाकों और लोगों तक पहुँच रही है और कहाँ सुधार की ज़रूरत है। साथ ही, इससे धोखाधड़ी को रोकना भी आसान हो जाएगा। आगे चलकर, महिला समृद्धि योजना, मुफ्त गैस सिलेंडर, विधवा और बुजुर्ग पेंशन जैसी योजनाओं में भी इसका इस्तेमाल होगा।
राशन कार्ड कैसे बनता है? दिल्ली में राशन कार्ड के लिए कुछ शर्तें हैं: आवेदक को भारतीय नागरिक होना चाहिए, आधार कार्ड होना चाहिए, सालाना कमाई एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए, बिजली कनेक्शन 2 किलोवाट से कम होना चाहिए, चार पहिया गाड़ी नहीं होनी चाहिए, परिवार का कोई सदस्य इनकम टैक्स नहीं देता हो और वो किसी A, B, C, D या E प्रॉपर्टी कैटेगरी में नहीं आता हो।




