
उत्तराखंड में 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाल स्थिति ने सभी को चिंतित कर दिया है। हाल ही में, नैनीताल के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने इस मुद्दे पर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की है और उन्होंने स्वास्थ्य सचिव को एक पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान की मांग की है।
पुरानी एंबुलेंस और सेवा में कमी – सांसद भट्ट ने अपने पत्र में बताया है कि राज्य में कई 108 एंबुलेंस पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जिससे कई बार आपातकालीन स्थितियों में लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि कैसे 8 जून को जगमोहन जलाल नाम के एक व्यक्ति की मौत का मुख्य कारण 108 एंबुलेंस सेवा की अनुपलब्धता बताया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने सुयालबाड़ी सीएचसी में एंबुलेंस की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया है। एक और घटना का जिक्र करते हुए, सांसद ने बताया कि कैसे कुछ समय पहले रात के समय एक गर्भवती महिला को ले जा रही एंबुलेंस रास्ते में ही खराब हो गई थी। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें खुद अपनी गाड़ी रोककर सीएमओ नैनीताल को फोन करना पड़ा और दूसरी एंबुलेंस मंगानी पड़ी। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि 108 एंबुलेंस सेवा कितनी बदहाल स्थिति में है और इससे कितना बड़ा खतरा लोगों के जीवन के लिए बन गया है।
नई एंबुलेंस और बेहतर सेवा की मांग – सांसद भट्ट ने स्वास्थ्य सचिव से मांग की है कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, जल्द से जल्द पुरानी और खराब एंबुलेंस को बदलकर नई लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम वाली एंबुलेंस दी जाएँ। उन्होंने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन स्थितियों में एक जीवनरेखा है और इसकी तकनीकी स्थिति, संचालन की गुणवत्ता, और उपलब्ध जीवनरक्षक सुविधाओं की गहन समीक्षा की जानी चाहिए।
उत्तराखंड की चुनौतियाँ और समाधान – उत्तराखंड का पहाड़ी इलाका और दुर्गम रास्ते इस समस्या को और भी गंभीर बनाते हैं। एंबुलेंस को पहाड़ी रास्तों पर चलना होता है, और पुरानी एंबुलेंस के खराब होने से लोगों को बहुत परेशानी होती है। इसलिए, नई और बेहतर एंबुलेंस की आवश्यकता और भी ज़्यादा महसूस की जा रही है। इसके अलावा, एंबुलेंस सेवा के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना भी बेहद ज़रूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों। सांसद भट्ट के पत्र से उम्मीद है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देगी और आवश्यक कदम उठाएगी।




