
राजनांदगांव में बीमा का महाघोटाला: किसानों के नाम पर लाखों की लूट!
लाखों का फर्जीवाड़ा, प्रशासन की जांच शुरू-राजनांदगांव जिले से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पहले कांग्रेस विधायक रहे छन्नी साहू जी ने जब इस मामले की शिकायत की, तो अब जिला प्रशासन की टीम इसकी पड़ताल में जुट गई है। इल्जाम यह है कि छुरिया ब्लॉक के आमगांव इलाके में बीमा कंपनी ने किसानों के नाम पर खूब हेरफेर की है। खास तौर पर, रबी की फसल चना के नाम पर यह पूरा घोटाला हुआ है, जबकि असल में वहां तो केले की खेती हो रही थी। कृषि अधिकारी टीकम ठाकुर ने भी यह बात मानी है कि आमगांव में बीमा को लेकर गड़बड़ी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चना फसल दिखाकर अलग-अलग खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए पांच लोगों की एक जांच टीम बनाई गई है, जो गांव जाकर किसानों और बाकी संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। उम्मीद है कि अगले एक हफ्ते के अंदर यह जांच रिपोर्ट कलेक्टर साहब को सौंप दी जाएगी, जिससे दोषियों पर कार्रवाई हो सके।
कैसे हुआ बीमा घोटाला, सामने आई सच्चाई-जांच-पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पिछले करीब एक साल से रैलिस बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की 40 हेक्टेयर जमीन पर, जो 34 खसरों में फैली है, सिर्फ केले की खेती हो रही थी। लेकिन, 2024-25 की रबी फसल के लिए इन खसरों पर चना की फसल दिखाकर बीमा करवा लिया गया। ऐसा कहा जा रहा है कि कृषि विभाग के कुछ अधिकारी, पटवारी और बीमा एजेंट की मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया। बिना फसल की कटाई देखे और बिना किसी पंचनामे के ही, किसानों के नाम पर चना फसल में नुकसान दिखाकर 25 लाख रुपये से ज्यादा का मुआवजा हड़प लिया गया। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी 2022-23 में ऐसा ही बीमा फर्जीवाड़ा सामने आया था, जब एक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने अपनी ही जमीन पर खुद के नाम से फसल बीमा करवाकर लाखों का फायदा उठाया था। तब भी शिकायत हुई थी, जांच भी हुई थी, पर कोई खास कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह साफ जाहिर होता है कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह गड़बड़झाला काफी समय से चल रहा है।
कंपनी ने बताया आरोप झूठा, दर्ज कराएगी रिपोर्ट-इस पूरे मामले पर रैलिस बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व पार्टनर जय बग्गा ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी जमीन के नाम पर जो बीमा में फर्जीवाड़ा हुआ है, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने न तो किसी को अपनी जमीन किराए पर दी है और न ही उनकी कंपनी के खाते में कोई पैसा आया है। बग्गा का कहना है कि इस फर्जीवाड़े से उनकी और उनकी कंपनी की इज्जत पर दाग लगा है, जो कि सरासर गलत है। वह इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने और मानहानि का केस करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उनके नाम का गलत इस्तेमाल करके किसानों के नाम पर लाखों का फायदा उठाया गया है। बग्गा ने साफ तौर पर कहा है कि वह इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे और जब तक जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
किसानों के नाम पर धोखा, बोले पूर्व विधायक-खुज्जी के पूर्व कांग्रेस विधायक छन्नी साहू ने इस पूरे मामले पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जहां पिछले दो सालों से लगातार केले की खेती हो रही है, वहां पर चना फसल दिखाकर 23 से 26 लाख रुपये का मुआवजा लेना सरासर लूट है। उन्होंने कहा कि जो योजनाएं किसानों के भले के लिए बनाई गई हैं, उनका फायदा असल किसानों को मिलना चाहिए। लेकिन जब इस तरह से फर्जीवाड़ा करके पैसे हड़प लिए जाते हैं, तो यह बहुत ही शर्मनाक बात है। छन्नी साहू ने कहा कि जो लोग सत्ता में बैठे हैं, वे सुशासन की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं पर आंखें मूंदे बैठे रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को सबके सामने लाकर ही सरकार को जगाने की कोशिश की जा रही है। उनका साफ कहना है कि किसानों के नाम पर इस तरह का फर्जीवाड़ा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जांच रिपोर्ट से तय होगी जिम्मेदारी-जिला प्रशासन ने इस पूरे घोटाले की जांच के लिए पांच सदस्यों की एक टीम का गठन किया है। इस टीम में तहसीलदार, कृषि अधिकारी और सांख्यिकी अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण अधिकारी शामिल हैं। टीम ने मौके पर पहुंचकर अपनी जांच शुरू कर दी है और किसानों से भी उनके बयान दर्ज किए हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह जांच बहुत ही गंभीरता से की जा रही है और अगले एक हफ्ते के अंदर कलेक्टर को इसकी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट में यह साफ हो जाएगा कि आखिर किन लोगों की मिलीभगत से यह पूरा फर्जीवाड़ा किया गया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही दोषियों पर कार्रवाई होने की उम्मीद है। फिलहाल, सभी किसानों और आम जनता की नजरें इस जांच पर टिकी हुई हैं। अगर यह रिपोर्ट निष्पक्ष तरीके से सामने आती है, तो यह न केवल इस घोटाले को उजागर करने में मदद करेगी, बल्कि किसानों के हक की लड़ाई में भी एक बड़ा कदम साबित होगी।




