भारतमाला घोटाले की परतें खुलने लगीं: दुर्ग और राजनांदगांव में मुआवजा अनियमितताओं की जांच शुरू

रायपुर-विशाखापत्तनम कॉरिडोर: किसानों का आक्रोश और मुआवजा घोटाला-रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना में एक बड़ा मुआवजा घोटाला सामने आया है जिससे किसानों में भारी रोष है। दुर्ग और राजनांदगांव जिलों में ज़मीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे में व्यापक अनियमितताएँ पाई गई हैं। सरकार ने जाँच शुरू कर दी है और जनता से शिकायतें माँगी हैं।
वेबसाइट पर ज़मीन की सूची-दुर्ग और राजनांदगांव जिलों के कलेक्टर कार्यालयों की वेबसाइट पर अधिग्रहीत ज़मीन की पूरी सूची उपलब्ध है। जो भी व्यक्ति मुआवजे को लेकर आपत्ति या शिकायत करना चाहता है, वह अगले 15 दिनों में आवेदन दे सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए एक कदम है कि सभी किसानों को उचित मुआवजा मिले।
किसानों के आरोप-कई किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा तय करने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है। पाटन, दुर्ग, राजनांदगांव, अभनपुर और आरंग तहसील के 51 गाँवों के किसानों ने आरोप लगाया है कि उनके हितों की अनदेखी की गई है। उनका मानना है कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है।
सरकार की कार्रवाई-करीब 325 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले के बाद सरकार हरकत में आई है। सभी संभागों के आयुक्तों से रिपोर्ट माँगी गई है और वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। ईओडब्ल्यू और एसीबी को जाँच का जिम्मा सौंपा गया है। इससे पता चलता है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
प्रभावित जिले-रायपुर-विशाखापत्तनम सिक्सलेन सड़क परियोजना राज्य के 11 जिलों से होकर गुजर रही है: रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा। इन जिलों में भू-अर्जन प्रक्रिया की जाँच चल रही है और कई गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं।




