छत्तीसगढ़

साइबर लॉ एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता” विषय पर सेमिनार – जिला न्यायालय, कोरबा में कलिंग विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित

रायपुर :कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 24 मार्च 2026 को जिला न्यायालय, कोरबा में “साइबर लॉ एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न्यायालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें अधिवक्ता संघ, कोरबा का सहयोग प्राप्त हुआ, जिन्होंने इस सत्र के आयोजन एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेमिनार में बड़ी संख्या में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम की गरिमा माननीय श्री गोपी कौशिक, निर्वाचन अधिकारी; अधिवक्ता रविन्द्र कुमार पराशर, सदस्य राज्य बार काउंसिल; अधिवक्ता गणेश कुलदीप, अध्यक्ष, बार काउंसिल; अधिवक्ता नूतन सिंह ठाकुर, सचिव, बार काउंसिल एवं सभापति, नगर निगम कोरबा; अधिवक्ता अनीश सक्सेना, उपाध्यक्ष, बार काउंसिल; अधिवक्ता अश्वाक अहमद, वरिष्ठ अधिवक्ता; तथा श्री अशोक कुमार तिवारी, सदस्य राज्य बार काउंसिल की उपस्थिति से बढ़ी। उनकी उपस्थिति ने विधिक समुदाय के सशक्त संस्थागत समर्थन को दर्शाया।
विशेष सत्र का संचालन सुश्री एकता चंद्राकर, सहायक प्राध्यापक, विधि संकाय द्वारा किया गया, जिन्होंने बौद्धिक संपदा कानूनों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों, मध्यस्थता (Arbitration) की रूपरेखा, सुलह (Mediation) प्रक्रियाओं, मध्यस्थता धाराओं के प्रारूपण, निर्णयो की वैधता तथा हाल के न्यायिक विकासों पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही, विवाद निवारण प्रक्रियाओं में अधिवक्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता तथा साइबर से संबंधित मामलों में निरंतर वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, इस चर्चा में आधुनिक विधिक अभ्यास में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं तथा न्यायिक मानकों के पालन के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्यों—जैसे पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तथा सिविल न्यायाधीश—की उपस्थिति ने इसे और अधिक गरिमामय बनाया, जो विधि के विकसित होते क्षेत्रों में निरंतर अधिगम एवं क्षमता निर्माण के प्रति न्यायपालिका के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
कलिंगा विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे प्रयास करता रहा है, जो शैक्षणिक संस्थानों और न्यायपालिका के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देते हैं, जिससे विधि शिक्षा और न्यायिक कार्यप्रणाली के बीच एक सशक्त समन्वय स्थापित हो सके। बार एवं बेंच के सदस्यों से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर, विश्वविद्यालय अब छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला न्यायालयों में इसी प्रकार के केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है, ताकि विधि अध्ययन और न्यायालयीन व्यवहार के बीच संबंध को और सुदृढ़ किया जा सके।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ और इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने व्यावसायिक विकास को समर्थन देने एवं न्याय वितरण प्रणाली को सशक्त बनाने के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया।

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