भारत ने अमेरिका को दिया कड़ा संदेश: कृषि, डेयरी और जीएम फूड पर नहीं होगी कोई रियायत

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: क्या है गतिरोध?-भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत में गतिरोध क्यों बना हुआ है, आइए समझते हैं। मार्च 2025 से शुरू हुई ये वार्ता 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। लेकिन, पांच दौर की बातचीत के बाद भी, कृषि, डेयरी और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थों पर सहमति नहीं बन पा रही है।
अमेरिका का नया शुल्क: भारत पर क्या असर?-अमेरिका ने हाल ही में भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने का ऐलान किया है। इससे टेक्सटाइल, चमड़ा, और आभूषण जैसे उद्योगों को भारी नुकसान हो सकता है। पहले से ही इन पर 6-9% टैक्स लगता था, जो अब बढ़कर 31-34% तक पहुँच जाएगा। हालांकि, कुछ क्षेत्र जैसे फार्मास्युटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा इससे अछूते रहेंगे। यह कदम भारत-अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा सकता है और छोटे व्यापारियों पर भारी पड़ सकता है। कई छोटे कारोबार पहले से ही कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और यह अतिरिक्त बोझ उनके लिए संकट बन सकता है। सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा और छोटे व्यापारियों को राहत देने के उपाय करने होंगे।
भारत की चिंताएँ: कृषि और डेयरी उत्पाद-भारत की 70 करोड़ से ज़्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है। यहाँ खेती सिर्फ़ व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। अगर भारत शुल्क कम करता है, तो अमेरिकी सब्सिडी वाले अनाज भारतीय बाज़ार में सस्ते में आ जाएँगे, जिससे छोटे किसानों की आय प्रभावित होगी। डेयरी उत्पादों के मामले में भी, भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाएँ जुड़ी हैं। वह जानवरों को मांस आधारित चारे से खिलाकर तैयार किए गए उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं देता, जिसे अमेरिका व्यापार बाधा मानता है। भारत के लिए अपने किसानों और उनकी आजीविका की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, वह इन मुद्दों पर समझौता करने में हिचकिचा रहा है। सरकार को एक संतुलित रणनीति अपनानी होगी जो देश के किसानों की रक्षा करे और साथ ही व्यापार संबंधों को भी मजबूत बनाए रखे।
जीएम फूड और यूरोपीय बाजार-जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थों को लेकर भी भारत सतर्क है। भारत का मानना है कि अमेरिकी GM उत्पादों के आयात से यूरोपीय संघ (EU) को होने वाले कृषि निर्यात पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि EU में GM खाद्य पदार्थों पर सख्त नियम हैं। इससे भारत के किसानों को नुकसान हो सकता है। इसलिए, भारत अपनी नीतियों पर अड़ा हुआ है और अमेरिकी दबाव में नहीं झुक रहा है। यह एक जटिल मुद्दा है जिसमें कई पहलुओं पर विचार करना ज़रूरी है। भारत को एक ऐसी रणनीति बनानी होगी जो देश के हितों की रक्षा करे और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों को भी ध्यान में रखे।


