
महाकाल की तीसरी शाही सवारी: उज्जैन में भक्ति का अद्भुत नजारा!-उज्जैन शहर में भगवान महाकालेश्वर की तीसरी शाही सवारी ने भक्ति और धूमधाम का एक अनोखा संगम प्रस्तुत किया। इस बार की सवारी और भी खास थी, क्योंकि बाबा महाकाल तीन अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों के दर्शन को आए।
तीन अलग-अलग रूपों में महाकाल का दर्शन-इस भव्य सवारी में भगवान महाकाल ने तीन अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों को नमन किया। पालकी में विराजमान थे चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमोहक मनमहेश, और गरुड़ रथ पर शिव तांडव के रूप में उनकी दिव्य उपस्थिति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सवारी से पहले मंदिर में पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद, मुख्य द्वार पर पुलिस ने भगवान को सलामी दी। सवारी का रास्ता महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार होते हुए रामघाट तक गया, जहाँ क्षिप्रा नदी के जल से उनका अभिषेक हुआ, जो एक अद्भुत दृश्य था।
हर भक्त के लिए लाइव दर्शन का अद्भुत अवसर-इस पवित्र यात्रा का अनुभव हर भक्त को हो, इस हेतु प्रशासन ने बेहतरीन इंतज़ाम किए। मंदिर समिति के फेसबुक पेज पर सवारी का लाइव प्रसारण हुआ, जिससे दूर बैठे भक्त भी इस पवित्र क्षण के साक्षी बन सके। साथ ही, चलते रथ में लगी एलईडी स्क्रीन से भी भक्तों को सजीव दर्शन का मौका मिला। यह व्यवस्था उन भक्तों के लिए बहुत मददगार रही जो भीड़ के कारण सवारी तक नहीं पहुँच पाए।
संगीत और नृत्य का मनमोहक संगम-सवारी को और भी यादगार बनाने के लिए कई बैंड और लोक नृत्यों की प्रस्तुतियाँ हुईं। पुलिस और बीएसएफ बैंड के साथ-साथ स्काउट गाइड, सरस्वती शिशु मंदिर और इम्पीरियल स्कूल के बैंड ने भी अपनी प्रस्तुति दी। जनजातीय कलाकारों ने करमा सैला, ढोलू कूनीथा, अहिराई और गणगौर जैसे पारंपरिक नृत्यों से माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। यह संगीत और नृत्य का ऐसा अद्भुत संगम था जिसने सवारी को और भी खास बना दिया।


