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चमोली में बादल फटने से तबाही, प्रशासन अलर्ट मोड पर

थराली में कुदरत का कहर: बादल फटने से मचा हाहाकार!

उत्तराखंड के थराली में अचानक आई आफत-उत्तराखंड के चमोली जिले में थराली के पास शुक्रवार की रात को जो हुआ, वो किसी बुरे सपने से कम नहीं था। अचानक बादल फटने की वजह से ऐसा लगा मानो आसमान से आफत बरस पड़ी हो। तेज बहाव के साथ आए मलबे ने पूरे थराली बाजार और आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते कई घर, दुकानें और गाड़ियां मलबे के नीचे दब गईं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। सबसे बुरा हाल तो एसडीएम आवास का हुआ, जो पूरी तरह से मलबे में समा गया। गनीमत रही कि प्रशासन ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया, जिससे स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सका।

प्रशासन की तत्परता: जिलाधिकारी ने संभाला मोर्चा-इस आपदा की खबर मिलते ही जिलाधिकारी संदीप तिवारी खुद मौके पर पहुंच गए। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से मिलकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने सभी को सतर्क रहने की सलाह दी और आश्वासन दिया कि सरकार हर संभव मदद करेगी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें पूरी तरह से बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। मलबा हटाने और रास्ते साफ करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके और सामान्य जीवन पटरी पर लौट सके।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि: स्कूलों में छुट्टी का ऐलान-लगातार हो रही भारी बारिश और इस आपदा को देखते हुए, प्रशासन ने थराली, देवाल और नारायणबगड़ ब्लॉक के सभी स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है। यह कदम बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इस मौसम में बच्चों का स्कूल आना-जाना काफी खतरनाक हो सकता था। प्रशासन का कहना है कि जब तक हालात पूरी तरह से सामान्य नहीं हो जाते, तब तक सुरक्षा को ही पहली प्राथमिकता दी जाएगी। अभिभावकों से भी अनुरोध किया गया है कि वे अपने बच्चों को घर पर ही सुरक्षित रखें।

घरों और गाड़ियों को भारी नुकसान: मलबे का तांडव-बादल फटने की इस घटना का सबसे ज्यादा असर मकानों और दुकानों पर पड़ा है। थराली बाजार में कई दुकानें मलबे से भर गईं और उनमें रखा सारा सामान बर्बाद हो गया। कई घरों की दीवारें और छतें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इतना ही नहीं, बाजार में खड़ी कई गाड़ियां भी मलबे के नीचे दब गईं, जिन्हें निकालने का काम अभी भी जारी है। स्थानीय लोग भी प्रशासन के साथ मिलकर बचाव कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द सब कुछ ठीक हो सके।

सड़कों का हाल बेहाल: यातायात ठप-कर्णप्रयाग-ग्वालदम सड़क पर भी इस बादल फटने और भारी बारिश का गहरा असर देखने को मिला। कई जगहों पर तो सड़कें पूरी तरह से बह गईं, जिससे वाहनों का आना-जाना पूरी तरह बंद हो गया। इस वजह से इलाके में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है। प्रशासन ने सड़कों को जल्द से जल्द ठीक करने के आदेश दिए हैं और काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया गया है। जब तक सड़कें ठीक नहीं हो जातीं, तब तक लोगों से अपील की गई है कि वे बेवजह यात्रा न करें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।

बचाव दल पूरी मुस्तैदी से जुटे: हर पल मदद जारी-एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं। वे मौके पर पहुंचकर लगातार मलबा हटाने, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और टूटी हुई सड़कों को खोलने का काम कर रही हैं। पुलिस भी इलाके में लगातार गश्त कर रही है, ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। प्रशासन ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि इस मुश्किल घड़ी में वे अकेले नहीं हैं और राहत कार्य लगातार जारी रहेंगे।

आमजन से अपील: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें-प्रशासन ने स्थानीय लोगों से खास अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। किसी भी आपात स्थिति में मदद के लिए प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। लोगों से यह भी कहा गया है कि वे नदियों और नालों के पास जाने से बचें, क्योंकि बारिश के कारण इनका जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है। प्रशासन का यही कहना है कि ऐसी मुश्किल परिस्थितियों से निपटने का सबसे अच्छा तरीका सतर्क रहना ही है।

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