
जंगल पर जंग: दो गांवों के बीच खूनी संघर्ष!-छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में जंगल की कटाई को लेकर दो गांवों, शामपुर और फुका गिरोला के बीच रविवार को जो हुआ, वो बेहद दुखद है। बात इतनी बढ़ गई कि नौबत मारपीट तक आ गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। ये कोई अचानक भड़की चिंगारी नहीं, बल्कि काफी समय से चला आ रहा तनाव था जो अब हिंसा का रूप ले चुका है।
घायलों का हाल बेहाल, अस्पताल में भर्ती-झगड़े में चोटिल हुए लोगों को फौरन जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं, जिससे गांवों में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। डॉक्टर पूरी लगन से सभी की देखभाल कर रहे हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।
थाने का घेराव, न्याय की गुहार-इस घटना से नाराज़ सैकड़ों ग्रामीण शाम को इकट्ठा होकर कोंडागांव थाने पहुँच गए। उन्होंने अवैध कटाई करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए ज़ोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि वे तो बस जंगल को बचाने की बात कर रहे थे, पर उन्हें ही पीटा गया। जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलती, उनका विरोध जारी रहेगा।
ग्रामीणों की दो टूक: कार्रवाई नहीं तो आंदोलन और तेज-ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जंगलों की कटाई पर रोक नहीं लगी, तो वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनका सीधा आरोप है कि सरकारी लापरवाही और कुछ लोगों की मनमानी के चलते जंगल तेज़ी से खत्म हो रहे हैं। उन्होंने थाने में यह भी कहा कि अगर दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई, तो वे अपना आंदोलन और भी उग्र कर देंगे।
विवाद की असली वजह: सिर्फ पेड़ नहीं, ज़मीन का भी है मामला-सूत्रों की मानें तो इस पूरे झगड़े की जड़ सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं है, बल्कि ज़मीन पर कब्ज़ा और सीमा से जुड़ा पुराना विवाद भी है। दोनों गांवों के बीच काफी समय से इस बात को लेकर अनबन चल रही थी। जंगल की ज़मीन पर कौन किसका हक़ है, इसको लेकर कई बार कहा-सुनी हो चुकी थी। इस बार मामला इतना बढ़ गया कि यह झगड़ा मारपीट तक पहुँच गया।
पुलिस एक्शन में, FIR की तैयारी शुरू-एडिशनल एसपी कौशलेन्द्र पटेल ने बताया कि पुलिस स्थिति को सामान्य बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। दोनों पक्षों को समझाया जा रहा है और जो भी लोग इस हिंसा में शामिल पाए जाएँगे, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
जंगल बचाओ, जीवन बचाओ: ग्रामीणों का संकल्प-ग्रामीणों का कहना है कि वे सिर्फ अपनी ज़मीन के लिए नहीं, बल्कि अपने जंगल को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। जंगल ही उनकी ज़िंदगी और रोज़ी-रोटी का एकमात्र सहारा हैं। अगर जंगल ही नहीं रहेंगे, तो उनका भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा। इसीलिए, वे अवैध कटाई के खिलाफ अपनी लड़ाई हर हाल में जारी रखेंगे।



