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छतरपुर में आदिवासियों से बर्बरता पर मचा बवाल – 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड, धरने के बाद हुई कार्रवाई

 छतरपुर की करुण गाथा: आदिवासियों पर पुलिस अत्याचार

पुलिस की बर्बरता: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आदिवासी युवकों के साथ हुई पुलिस की क्रूरता की खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया है। ट्रांसफॉर्मर चोरी के शक में तीन आदिवासी युवकों को चार दिन तक बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया। यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है बल्कि आदिवासियों के अधिकारों के हनन को भी उजागर करती है।

चार दिनों की यातना: पुलिस ने तीनों युवकों को बिना किसी ठोस सबूत के उठा लिया और चार दिनों तक पीटा। उनके हाथ-पैरों पर डंडे बरसाए गए और उन्हें कई तरह के अत्याचार सहने पड़े। परिवार वालों को भी इस दौरान कोई जानकारी नहीं दी गई। यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।

अर्धनग्न अवस्था में एसपी कार्यालय: पीड़ित युवक अर्धनग्न अवस्था में ठेले पर एसपी कार्यालय पहुंचे। उनके शरीर पर चोटों के निशान साफ दिख रहे थे। यह दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आदिवासियों के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?

पुलिसकर्मियों का निलंबन: इस घटना के बाद पुलिस अधीक्षक ने तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। लेकिन भीम आर्मी ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो और पीड़ितों को मुआवजा मिले।

प्रदेश स्तर पर आवाज: भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष ने इस मामले को राज्य सरकार के सामने उठाने की बात कही है। पीड़ितों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी। छतरपुर की यह घटना आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों का एक और उदाहरण है। पुलिस को अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए और मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए। सरकार को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

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