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बड़ी राहत की खबर: अब हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर नहीं लगेगा GST? जानिए क्या है पूरा मामला

बीमा पॉलिसी पर जीएसटी खत्म होने की तैयारी: आम आदमी को बड़ी राहत!-अगर आप हेल्थ या लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी तोहफे से कम नहीं है। केंद्र सरकार अब हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाले 18% जीएसटी को पूरी तरह खत्म करने की सोच रही है। हाल ही में, राज्यों और केंद्र सरकार के बीच इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसमें ज्यादातर राज्यों ने अपनी सहमति जताई है। अगर यह फैसला हो जाता है, तो लाखों लोग जो बीमा पॉलिसी लेते हैं, उन्हें सीधे तौर पर फायदा होगा और प्रीमियम की रकम में कमी आएगी। यह एक ऐसा कदम है जो आम आदमी को सीधे तौर पर राहत देगा और बीमा सेक्टर को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेगा।

जीएसटी माफी का प्रस्ताव: अब तक क्या हुआ?-बुधवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में, मंत्रियों के समूह (GoM) ने हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस चर्चा में बिहार के डिप्टी सीएम, सम्राट चौधरी ने बताया कि लगभग सभी राज्यों ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी है, हालांकि कुछ राज्यों ने अपनी कुछ चिंताएं भी व्यक्त की हैं। वर्तमान में, हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर 18% जीएसटी लगाया जाता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में, केवल हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम से ही सरकार ने 8,262 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी एकत्र किया है। सरकार का मानना है कि इस टैक्स को हटाने से न केवल आम लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि यह बीमा क्षेत्र के विकास को भी गति देगा। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए जीएसटी काउंसिल के सामने रखा जाएगा, जहाँ इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

राज्यों की शर्त: फायदा सीधा जनता तक पहुँचे-तेलंगाना के डिप्टी सीएम, मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने इस मामले पर एक महत्वपूर्ण बात रखी। उन्होंने कहा कि जीएसटी हटाने से सरकार को सालाना लगभग 9,700 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। लेकिन, उनकी मुख्य शर्त यह है कि इस फैसले का लाभ बीमा कंपनियों को नहीं, बल्कि सीधे पॉलिसीधारकों को मिलना चाहिए। इसके लिए एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे प्रीमियम की कीमतों में वास्तविक कमी आए। इसका मतलब यह है कि जीएसटी माफी का असर सिर्फ कागजों पर नहीं दिखना चाहिए, बल्कि बीमा खरीदने वालों की जेब पर भी इसका सीधा असर महसूस होना चाहिए। जीएसटी काउंसिल अब इस बात पर विचार करेगी कि टैक्स में की गई कटौती का सीधा लाभ आम आदमी तक कैसे पहुँचाया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह पहल वास्तव में लोगों के लिए फायदेमंद हो।

मुआवज़ा सेस पर भी हुई चर्चा, लेकिन कोई समाधान नही-जीएसटी की इस बैठक में मुआवज़ा सेस (Compensation Cess) के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। वर्तमान में, कई राज्यों को उनके राजस्व घाटे की भरपाई के लिए यह सेस लगाया जाता है। पंजाब जैसे राज्यों ने चिंता जताई है कि जीएसटी लागू होने के बाद से उन्हें हर साल भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। पंजाब के वित्त मंत्री, हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि उनके राज्य को हर साल लगभग 21,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को 2.69 लाख करोड़ रुपये का ऋण देकर सहायता प्रदान की थी। यह ऋण 30 अक्टूबर 2025 तक चुका दिया जाएगा, जिसके बाद मुआवज़ा सेस की वसूली बंद हो जाएगी। लेकिन इसके बाद राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है, जो एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

क्या जीएसटी का ढांचा बदलेगा?-जीएसटी को लागू हुए अब लगभग आठ साल हो चुके हैं, और सरकार इसे और भी सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। वर्तमान में, जीएसटी की चार मुख्य दरें हैं: 5%, 12%, 18%, और 28%। रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें और आवश्यक वस्तुओं पर या तो जीएसटी नहीं है या फिर केवल 5% टैक्स लगता है, जबकि लग्जरी और ‘सिन गुड्स’ (ऐसी वस्तुएं जो स्वास्थ्य या नैतिकता के लिए हानिकारक मानी जाती हैं) पर 28% टैक्स और सेस लगाया जाता है। सरकार का एक प्रस्ताव यह भी है कि टैक्स स्लैब को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाए – 5% और 18%, और कुछ विशेष वस्तुओं पर 40% तक टैक्स लगाया जाए। इस बदलाव से न केवल टैक्स का ढांचा आसान होगा, बल्कि इससे जुड़े विवाद भी कम होंगे और व्यापारियों के लिए व्यापार करना भी सुगम हो जाएगा। इसका सीधा असर आम आदमी पर भी पड़ेगा, क्योंकि कई वस्तुओं की कीमतें कम हो सकती हैं, जिससे उनकी खरीदारी आसान हो जाएगी।

आम आदमी के लिए कितना फायदेमंद होगा यह बदलाव?-एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए टैक्स सुधार से सरकार को हर साल लगभग 85,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है। लेकिन, इसके विपरीत, इससे अर्थव्यवस्था को लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये का फायदा होने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि टैक्स कम होने से वस्तुओं की कीमतें घटेंगी, जिससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और वे अधिक खरीदारी कर पाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संकेत दिया था कि जीएसटी सुधार आम लोगों के लिए ‘दीवाली का तोहफा’ साबित हो सकते हैं, जो निश्चित रूप से आम जनता के लिए एक अच्छी खबर है।

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