दिल्ली

कला संकुल में मासिक संगोष्ठी का आयोजन, विभिन्न भारतीय कलाओं का प्रदर्शन

नई दिल्ली। संस्कार भारती के केंद्रीय कार्यालय ‘कला संकुल’ में मासिक कला संगोष्ठी का आयोजन सांस्कृतिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम ने विश्व की प्राचीन परंपराओं को समकालीन परिप्रेक्ष्य में जीवंत कर दिया और श्रोताओं-दर्शकों में गहरी अनुभूति का सृजन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पंडित पंकज विशाल के सितार वादन से हुई, जिनकी मधुर धुनों ने श्रोताओं को राग-रंग की अनंत गहराई में डुबो दिया। इनके साथ संगत पर उस्ताद मुस्तफा हुसैन के तबला वादन ने लय और ताल की जादुई दुनिया रच दी, जहां हर बोल संस्कृति की धड़कन बन गया।

इसके बाद कृपा तेंडुलकर की कथक नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-भंगिमाओं, चरन-कुशलता और आध्यात्मिक ऊर्जा के अनुपम संगम से सराबोर कर दिया। तीनों कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय कला की अमर परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिखाया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चरल स्टडीज संगठन मंत्री संदीप कवीश्वर ने “विश्व की प्राचीन परंपराएं” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चरल स्टडीज के कार्य उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए प्रकृति पूजा, विश्व बंधुत्व एवं प्राचीन परंपराओं की महत्वता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में विश्व के सभी भागों में अच्छी परंपराएं विकसित हुईं, यह सकारात्मक है कि इनमें से कई परंपराएं आज भी जीवित हैं।

‘कला संकुल’ के इस आयोजन में कला प्रेमी, बुद्धिजीवी, छात्र-छात्राएं, संस्कृति अनुरागी और आमजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। जिसमें प्रसद्धि शास्त्रीय गायिका नवनीता चौधरी, वरिष्ठ रंगकर्मी अवतार, आई एन सी के कला दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा कंबोज, कवित्री, चित्रकार, गायिका निशि सिंह, लाइट डिजाइनर मिलिंद श्रीवास्तव, कथक नृत्यगना रेखा मेहरा, निशांत गुप्ता, कला साधिका दीपाली, विदेश मंत्रालय की उप सचिव मेघना व्यास अरोड़ा, संगीत शिक्षक डॉ. लोकेश वर्मा, तबला वादक नागेश्वर कर्ण सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहें।

संगोष्ठी का सफल संचालन संगोष्ठी संयोजिका ऋतम्भरा रिमझिम ने किया।

कार्यक्रम की समाप्ति भारतीय कला, संगीत और विश्व की प्राचीन आध्यात्मिक- सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरे समर्पण एवं कृतज्ञता के भाव के साथ हुई।

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