उत्तरप्रदेश

गंगा दशहरा पर महाभारत कालीन गंगा के पांचाल घाट पर उमड़ी भक्तों की भीड़

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रूखाबाद में गंगा दशहरा के अवसर पर सोमवार को पवित्र गंगा नदी के पांचाल घाट पर हजारों भक्तों ने डुबकी लगाई। जिले भर के सभी गंगा घाटों पर गंगा भक्तों की भीड़ लगी रही। सबसे ज्यादा भीड़ महाभारतकालीन गंगा घाट पांचाल घाट पर भक्तों की उमड़ी भीड़ की बजह मार्ग सकरे पड़ गए। पुलिस एवम प्रशासन को यातायात बहाल रखने में पसीने छूट गए

जिलाधिकारी अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह भी मेले में घूम-घूम कर शांति व्यवस्था का जायजा लेते रहे।

पांचाल घाट पर गंगा में बैरिकेडिंग करा कर पीएसी के तैराक जवान तैनात रहे। गंगा भक्तों की सुरक्षा के लिए तट पर भारी संख्या में पुलिसबल तैनात रहा।

गंगा तट पांचालघाट से लेकर श्रंगीरामपुर में सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट तैनात रहे। गंगा दशहरा पर्व पर गंगा स्नान के सम्बंध में जूना अखाड़े के अध्यक्ष सत्य गिरी महाराज बताते हैं कि आज के दिन गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस बजह से आज के दिन गंगा स्नान करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उनका कहना है कि गंगा दशहरा पर्व पर पांचाल प्रदेश के राजा द्रोपद की पुत्री द्रोपदी यहां टेंट लगा कर निवास कर दान पुण्य कर गंगा स्नान करती थीं। इस बजह इस घाट को आज भी पांचाल घाट के नाम से जाना जाता है।

यहां दुर्वाशा ऋषी ने रह कर अखंड साधना की थी। आज भी गंगातट पर दुर्वाशा आश्रम बना हुआ है। उसमें हजारों सन्त रह कर गंगा स्नान कर अखंड साधना करते हैं। पूज्य सन्त प्रेमानन्द महाराज भी इस स्थान पर निवास कर चुके हैं।

संतों की घाटियों में रहने की वजह से इस घाट का नाम घटिया घाट के नाम से भी जाना जा रहा है। घाटियों में रहकर संत महात्मा साधना करते थे। जिनकी चरण रज की वजह से यह स्थान पवित्र हो गया है। महात्मा सत्यागिरी महाराज बताते हैं कि इसी तरह से श्रंगी रामपुर में राजा दशरथ के बहनोई श्रंगी ऋषी ने यहां अखंड साधना की थी। इस वजह से इस घाट का नाम श्रंगी रामपुर पड़ा। श्रंगी रामपुर में आज भी प्रदेश भर से संत महात्मा आकर स्नान करते हैं। श्रंगी रामपुर का जिक्र हमारे शास्त्रों में भी है। आज इस स्थान पर गंगा भक्तों का भारी मेला लगा हुआ है और भक्त गंगा स्नान करके आत्मिक आनंद और मानसिक शांति की अनुभूति कर रहे हैं। हालांकि गंगा स्नान के समय जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। भोर से ही श्रद्धालु गंगा में स्नान कर रहे हैं।

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