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रूस की दुनिया को चेतावनीः तेल कीमतों में विस्फोटक बढ़ौतरी को रहो तैयार, 150 डॉलर पार जा सकता कच्चा तेल

International Desk: वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल सकता है।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रीव ( Kirill Dmitriev) जो  Putin के विशेष निवेश एवं आर्थिक सहयोग दूत हैं,ने चेतावनी दी है कि अगले 2–3 हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते हमले वैश्विक तेल बाजार को गंभीर झटका दे रहे हैं।

JUST IN: 🇷🇺 President Putin’s Special Envoy Kirill Dmitriev says oil prices will surge over $150 in the next 2–3 weeks. pic.twitter.com/tYExv7Zvv7

— BRICS News (@BRICSinfo) March 16, 2026

क्यों बढ़ सकता है तेल 150 डॉलर तक

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट
दिमित्रीव के अनुसार कीमतों में संभावित उछाल के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें पहला है Strait of Hormuz जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से लगभग दुनिया के 20% तेल की आपूर्ति गुजरती है। युद्ध के कारण कई टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है और समुद्री यातायात में भारी गिरावट आई है।

मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ठिकानों पर हमले
Iran, Israel और United States के बीच संघर्ष के दौरान तेल व गैस इंफ्रास्ट्रक्चर भी निशाने पर आ रहा है, जिससे सप्लाई का जोखिम बढ़ गया है। दिमित्रीव ने कहा कि ब्रेंट क्रूड पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है और युद्ध लंबा खिंचा तो कीमतें 150 डॉलर या उससे भी ज्यादा (200 डॉलर तक) जा सकती हैं।

वैश्विक ऊर्जा संकट की चेतावनी
हाल ही में दिमित्रीव ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक में भी वैश्विक ऊर्जा संकट पर चर्चा की थी। रिपोर्टों के अनुसार युद्ध और समुद्री मार्गों के बाधित होने से लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 20% है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है, क्योंकि वह दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में से एक है। हालांकि कई पश्चिमी देशों का मानना है कि यह उछाल वैश्विक महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक अस्थिरता को भी बढ़ा सकता है।

G7 की आपात तैयारी
ऊर्जा कीमतों को काबू में रखने के लिए G7 देशों द्वारा रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ा या मध्य-पूर्व युद्ध लंबा चला, तो दुनिया 2008 के बाद का सबसे बड़ा तेल मूल्य संकट देख सकती है।

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