दिल्ली

भारत टैक्सी में न प्लेटफॉर्म शुल्क, न कमीशन, पूरी कमाई सारथी की : अमित शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि सारथी की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी’ निजी एग्रीगेटर मॉडलों से बिल्कुल अलग है। इसमें सारथी से कोई प्लेटफॉर्म शुल्क या कमीशन नहीं लिया जाता और यात्रा से होने वाली पूरी कमाई सीधे सारथी को मिलती है।

अमित शाह ने मंगलवार को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत टैक्सी- सारथी (ड्राइवरों) के हितों को सर्वोपरि रखते हुए तैयार किया गया प्लेटफॉर्म है। यह देश का पहला सहकारी आधारित राइड-हेलिंग ऐप है जो शून्य कमीशन मॉडल पर संचालित हो रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर न तो सारथी से कोई प्लेटफॉर्म फीस ली जाती है और न ही यात्रियों से कोई सुविधा शुल्क वसूला जाता है। इससे सारथी की आय में सीधा और स्थायी लाभ सुनिश्चित होता है।

उन्होंने बताया कि भारत टैक्सी को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत किया गया है। यह सारथी को केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि सहकारी संस्था का सदस्य और लाभ का भागीदार बनाता है। प्लेटफॉर्म से होने वाला लाभ निवेशकों को नहीं, बल्कि सीधे सारथियों में वितरित किया जाता है।

शाह ने बताया कि वर्तमान में भारत टैक्सी दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में संचालित है। ऐप पर 990,082 पंजीकृत ग्राहक और 3 लाख से अधिक पंजीकृत सारथी हैं, जिन्होंने 2,91,665 राइड पूरी की हैं। सरकार का लक्ष्य 2029 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में इसका विस्तार करना है।

उन्होंने बताया कि सारथी की सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म पर स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, रिटायरमेंट सेविंग और 24×7 ड्राइवर सपोर्ट सिस्टम की सुविधा दी जा रही है। दिल्ली में सात स्थानों पर सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां सारथी को प्रत्यक्ष सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने बताया कि भारत टैक्सी सारथी को किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर काम करने की पूरी स्वतंत्रता भी देता है, जिससे उन पर किसी प्रकार की एक्सक्लूसिव बाध्यता नहीं रहती। साथ ही, आपात स्थिति में त्वरित सहायता और सत्यापित राइड डेटा उपलब्ध कराकर सारथी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

महिला सारथी को आगे लाने के लिए “बाइक दीदी” जैसी पहल के तहत अब तक 150 से अधिक महिलाएं भारत टैक्सी से जुड़ चुकी हैं, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है।

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