प्रेरणादायी सेमिनार : डॉ. लाल उमेद सिंह ने साझा किया संघर्ष और सफलता का सूत्र
रायपुर की प्रमुख शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्था युवा द्वारा आज एक प्रेरणादायी सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें

रायपुर :-रायपुर की प्रमुख शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्था युवा द्वारा आज एक प्रेरणादायी सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि और वक्ता डॉ. लाल उमेद सिंह, आईपीएस, वर्तमान में रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने अपने जीवन के संघर्षों और सफलता के गुर साझा किए। इस अनुभवी अधिकारी ने अपने जीवन के विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से उपस्थित युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जीवन में आगे बढ़ने के व्यावहारिक सूत्र सिखाए। सेमिनार का उद्देश्य युवाओं को कठिनाइयों के बीच भी दृढ़ संकल्प और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा प्रदान करना था।
डॉ. सिंह ने अपने संघर्षों के बारे बताया
डॉ. लाल उमेद सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत अपने बचपन के संघर्षों से की। उन्होंने बताया कि वे छत्तीसगढ़ के पेंड्रा क्षेत्र के एक छोटे से दूरस्थ गांव मझगवां से आते हैं, जहां शिक्षा की सुविधाएं बेहद सीमित थीं। प्राथमिक स्कूल में मात्र एक शिक्षक पांचों कक्षाओं को पढ़ाया करते थे। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें अन्य गांवों तक पैदल जाना पड़ता था। फिर भी, उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आज भी उनकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से शुरू होकर रात 2 बजे तक चलती रहती है। डॉ. सिंह ने कहा, “मैंने इन कठिनाइयों को तक्लीफ के रूप में नहीं, बल्कि एक रोमांचक यात्रा के रूप में लिया। जीवन के हर मोड़ पर चुनौतियों को एंजॉय करना ही असली सफलता का राज है।”

“संघर्ष ही हमें मजबूत बनाते हैं”
उन्होंने पीएससी परीक्षा (राज्य लोक सेवा आयोग) को क्लियर करने की अपनी कहानी साझा की, जब गांव वालों को विश्वास ही नहीं हुआ कि यह गांव का साधारण लड़का इतना बड़ा अधिकारी बन जाएगा। खेती-बाड़ी के दौरान आराम के समय भी वे किताबें निकालकर पढ़ाई करते थे। नारायणपुर में पोस्टिंग के दौरान भी, कर्तव्यों को पूरा करने के बाद समय निकालकर तैयारी करते रहे। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा, “संघर्ष ही हमें मजबूत बनाते हैं”।
सेमिनार में सफलता प्राप्त करने के लिए डॉ. लाल उमेद सिंह ने कई व्यावहारिक टिप्स साझा किए, जो युवाओं के लिए जीवन भर प्रासंगिक रहेंगे। उनके प्रमुख सुझाव निम्नलिखित थे:
1. मेहनत पर अटूट विश्वास : डॉ. सिंह ने कहा, “मेहनत में सबसे ज्यादा विश्वास करना चाहिए। इसका कोई विकल्प नहीं है। चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, कड़ी मेहनत ही आपको लक्ष्य तक पहुंचाएगी। मेरे जीवन में हर सफलता मेहनत का फल है।”
2. काम के प्रति समर्पण : उन्होंने जोर दिया कि “काम के लिए भक्ति भाव अपनाना जरूरी है, चाहे काम छोटा हो या बड़ा। रास्ता वही से निकलेगा। जब आप अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित होते हैं, तो सफलता स्वाभाविक रूप से आपके कदम चूमती है।”
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3. जिद और आत्म-विद्रोह : सफलता के लिए “जिद करना सीखना होगा। अपने आप से बगावत करना सीखें, ताकि बाकी सारी चुनौतियां खुद-ब-खुद साइड हो जाएं।” डॉ. सिंह ने बताया कि यह जिद ही उन्हें कठिन परीक्षाओं से गुजरने की ताकत देती रही।
4. सकारात्मक सोच और विपरीत परिस्थितियों का सामना : “कमी सबमें होती है, लेकिन सकारात्मक सोच रखेंगे तो बेहतर होंगे। अभाव में सर्वाइव करना सीखें, क्योंकि आपदा ही तो अवसर लाती है। आपदा को अवसर में बदल दें। प्रतिकूल परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, लक्ष्य से कभी भटकना नहीं चाहिए।” उन्होंने अपने गांव के अनुभवों से उदाहरण देकर समझाया कि कैसे सीमित संसाधनों में भी सपनों को जीवित रखा जा सकता है।
5. स्क्रीन टाइम कम करें : आधुनिक युवाओं को चेतावनी देते हुए कहा, “स्क्रीन टाइम को कम करना होगा। वास्तविक दुनिया और वर्चुअल दुनिया अलग-अलग हैं। रील लाइफ के चक्कर में रियल लाइफ को न भूलें। समय का सदुपयोग पढ़ाई और वास्तविक अनुभवों में करें।”
6. परिवार से सलाह लें : “कभी कोई समस्या हो या कहीं फंस जाएं, तो पहले परिवार के साथ परामर्श करें। परिवार ही हमारी सबसे बड़ी ताकत होता है। उनकी सलाह जीवन के फैसलों को मजबूत बनाती है।”

श्री राजीव ने उपस्तिथियों का आभार व्यक्त किया
डॉ. सिंह के संबोधन ने उपस्थित युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित किया, बल्कि जीवन की हर चुनौती को अवसर में बदलने का संदेश भी दिया। सेमिनार के अंत में युवा के संस्थापक श्री एम. राजीव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “डॉ. लाल उमेद सिंह का यह प्रेरक संबोधन हमारे युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश है। उनके जीवन के उदाहरण हमें सिखाते हैं कि गांव की मिट्टी से निकलकर भी आसमान छूया जा सकता है। युवा संस्था ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा शक्ति को मजबूत बनाने के प्रति प्रतिबद्ध है।” श्री राजीव ने उपस्थित सभी अतिथियों, युवाओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
यह सेमिनार युवा संस्था के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है, जो छत्तीसगढ़ के युवाओं को शैक्षणिक, सामाजिक और व्यक्तिगत विकास के लिए प्रेरित करता रहता है। संस्था ने भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया है, ताकि युवा अपने सपनों को साकार कर सकें और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें। डॉ. लाल उमेद सिंह जैसे प्रेरक व्यक्तित्वों का मार्गदर्शन निश्चित रूप से युवाओं को आत्मनिर्भर और दृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होगा।



