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GST: भारत की टैक्स व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव और छत्तीसगढ़ की नई उड़ान

भारत की टैक्स यात्रा: मनुस्मृति से लेकर GST के चमत्कारी बदलाव तक!-जब से इंसान ने समाज बनाना शुरू किया, तब से ही लेन-देन और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ नियम-कायदे रहे हैं। भारत में टैक्स या कर का इतिहास भी उतना ही पुराना है। सोचिए, हमारे प्राचीन ग्रंथों जैसे मनुस्मृति और चाणक्य के अर्थशास्त्र में भी टैक्स वसूलने के ऐसे सिद्धांत बताए गए हैं जो आज भी प्रासंगिक लगते हैं – कि टैक्स ऐसा होना चाहिए जो जनता को ज्यादा खटके नहीं, और राजा या सरकार उसका इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए ही करे। फिर आया ब्रिटिश काल, जब 1860 में पहली बार भारत में इनकम टैक्स जैसा कानून बना। लेकिन असली खेल तो 1 जुलाई 2017 को शुरू हुआ, जब हमारे देश में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST लागू हुआ। इसे ‘एक देश, एक टैक्स’ का नाम दिया गया क्योंकि इसने पहले के 17 अलग-अलग तरह के सेंट्रल और स्टेट टैक्स को मिलाकर एक ही सिस्टम बना दिया। इससे बिजनेस करना बहुत आसान हो गया और पूरा टैक्स सिस्टम एकदम साफ-सुथरा और पारदर्शी हो गया। आज आप जो सड़कें देखते हैं, अस्पताल हैं, या कोई बड़ी डेवलपमेंट का काम हो रहा है, वो सब आपके दिए हुए टैक्स के पैसों से ही तो हो रहा है। GST आने के बाद से तो डिजिटल रिकॉर्ड रखना और भी आसान हो गया है, और ई-वे बिल जैसी चीजें बिजनेस में ईमानदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा दे रही हैं।

GST ने कैसे बदल दी बिजनेस की दुनिया और बढ़ाई पारदर्शिता?-GST के आने के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था में वाकई एक बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां सिर्फ 66 लाख के करीब लोग ही टैक्स भरते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 1.4 करोड़ से भी ऊपर पहुंच गया है! यह छोटे व्यापारियों के लिए भी बहुत राहत की बात है, क्योंकि अब उन्हें अलग-अलग राज्यों के उलझे हुए नियमों से नहीं जूझना पड़ता। एक ही सिस्टम होने से न केवल बिजनेस करना आसान हुआ, बल्कि ग्राहकों को भी फायदा हुआ क्योंकि चीजों के दाम ज्यादा स्थिर और वाजिब हो गए। इसका असर ऐसा है कि अब हर महीने GST कलेक्शन 1.6 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो रहा है। इस साफ-सुथरी व्यवस्था ने भारत की दुनिया भर में इज्जत भी बढ़ाई है। इसी का नतीजा है कि 2014 से 2020 के बीच, भारत की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में 79 पायदान का सुधार हुआ है। इससे साफ पता चलता है कि GST ने देश की आर्थिक तरक्की में कितनी बड़ी भूमिका निभाई है।

जनता को राहत देने के लिए टैक्स की दरों में किए गए बदलाव-GST काउंसिल लगातार इस बात का ध्यान रखती है कि आम आदमी और व्यापारियों पर टैक्स का बोझ ज्यादा न पड़े। इसीलिए कई चीजों पर टैक्स की दरें कम की गई हैं। जैसे, पहले हेयर ऑयल और साबुन जैसी चीजों पर 28% टैक्स लगता था, जिसे घटाकर 18% कर दिया गया। सैनिटरी नैपकिन को तो पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया ताकि महिलाओं पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसी तरह, जरूरी दवाइयों और डेयरी उत्पादों पर सिर्फ 5% टैक्स रखा गया है। यहाँ तक कि 7,500 रुपये तक के होटल रूम्स पर भी GST को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इन सब कदमों से यह साफ होता है कि सरकार का मकसद लोगों को राहत देना और देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टैक्स सिस्टम को और भी आसान बनाना है।

छत्तीसगढ़ के लिए GST क्यों बना वरदान?-GST जैसे सुधारों का सबसे ज्यादा फायदा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को मिला है। यहाँ लगभग 60,000 छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) हैं, जिन्हें GST की वजह से अब कम टैक्स देना पड़ रहा है और उनके लिए नियम-कानून का पालन करना भी आसान हो गया है। इससे उनके उत्पाद और भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। छत्तीसगढ़ वैसे भी स्टील और सीमेंट बनाने में पूरे देश में आगे है। अब कोयले जैसे कच्चे माल पर GST की दर 18% से घटाकर 5% कर दी गई है, जिससे कंपनियों के पास ज्यादा पैसा बचेगा और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। किसानों को भी बड़ा फायदा हुआ है क्योंकि ज्यादातर ताजे फल-सब्जियों पर GST नहीं लगता और खेती के औजारों पर भी टैक्स की दरें कम हैं। तेंदूपत्ता और बीड़ी उद्योग, जो लाखों आदिवासी परिवारों को रोजगार देता है, उसके लिए भी खास तौर पर कुछ व्यवस्थाएं की गई हैं। यह दिखाता है कि सरकार ने पुरानी परंपराओं और आधुनिक विकास दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की है।

GST: एक ऐसे भारत की ओर कदम, जो समृद्ध और पारदर्शी हो-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में GST में किए गए ये बदलाव सिर्फ एक नया कानून नहीं हैं, बल्कि ये एक नए भारत की बुनियाद हैं। यह टैक्स सिस्टम न सिर्फ व्यापारियों और किसानों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है, बल्कि हर परिवार को इससे कहीं न कहीं राहत मिली है। GST ने यह साबित कर दिया है कि एक ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था ही देश को तरक्की की राह पर ले जा सकती है। आज भारत दुनिया में एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के तौर पर जाना जा रहा है। आने वाले समय में यह व्यवस्था और भी मजबूत होगी और छोटे व्यवसायों से लेकर बड़े उद्योगों तक, सभी को इसका लाभ मिलेगा। इस सुधार ने भारत को आर्थिक रूप से और भी ज्यादा आत्मनिर्भर बनाया है।

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