उज्जैन में कांग्रेस जिला अध्यक्ष की नियुक्ति पर बवाल, कार्यकर्ताओं ने सड़क पर लेटकर रोका काफिला

उज्जैन कांग्रेस में हंगामा: महेश परमार की नियुक्ति पर कार्यकर्ताओं का भारी विरोध!
जिला अध्यक्ष की ताजपोशी बनी बवाल की जड़-उज्जैन में कांग्रेस पार्टी के नए जिला अध्यक्ष के रूप में महेश परमार की नियुक्ति ने पार्टी के भीतर ही खलबली मचा दी है। कार्यकर्ताओं का एक बड़ा समूह इस फैसले से नाखुश है और उनका मानना है कि हेमंत सिंह चौहान को अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था। इस असंतोष को व्यक्त करने के लिए, मंगलवार शाम को कांग्रेस समर्थक सड़कों पर उतर आए और जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। यह विरोध प्रदर्शन पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर करता है।
नेता प्रतिपक्ष का काफिला रोका, सड़क पर लेटकर जताया विरोध-विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया जब उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के काफिले को रोक दिया। कुछ समर्थक तो सड़क पर लेटकर अपना विरोध जताने लगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक महेश परमार को हटाकर हेमंत सिंह चौहान को जिला अध्यक्ष नहीं बनाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। यह कदम पार्टी नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट संदेश था कि कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
माहौल गरमाया, सिंघार की गाड़ी के सामने नारेबाजी-गुस्से से भरे कार्यकर्ताओं ने उमंग सिंघार की कार को घेर लिया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि काफिले को आगे बढ़ने में मुश्किल हुई और यातायात भी बाधित हुआ। इस दौरान, भीड़ ने हेमंत सिंह चौहान के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाई और यह स्पष्ट कर दिया कि वे अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
सिंघार ने संभाला मोर्चा, चौहान से की व्यक्तिगत बातचीत-हालात को काबू में करने के लिए, उमंग सिंघार ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने हेमंत सिंह चौहान को अपनी गाड़ी में बिठाया और उनसे व्यक्तिगत रूप से बात की। सिंघार ने चौहान को आश्वासन दिया कि इस पूरे मामले को संगठन के स्तर पर उठाया जाएगा और सभी की राय को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में सभी की बात सुनी जाएगी।
जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से बढ़ा आक्रोश-इस पूरे घटनाक्रम पर हेमंत सिंह चौहान ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी लगातार जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है। यही उपेक्षा कार्यकर्ताओं में रोष पैदा कर रही है और उन्हें इस तरह से विरोध करने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर उठा नया सवाल-महेश परमार की नियुक्ति के बाद हुआ यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं की आवाज को तवज्जो देता है या फिर हाईकमान के फैसले पर ही कायम रहता है। यह स्थिति पार्टी के भविष्य के लिए अहम साबित हो सकती है।



