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ग्वालियर में 51 लाख की ठगी का पहला डिजिटल अरेस्ट केस खत्म, सभी आरोपी बरी

51 लाख की ठगी! फिर भी आरोपी बरी, जानिए कैसे?-यह मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से है, जहाँ एक 72 साल की रिटायर्ड शिक्षिका के साथ 51 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती! आइए, जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी कहानी।

72 साल की शिक्षिका से हुई ऑनलाइन ठगी-मार्च 2024 में, 72 वर्षीय आशा भटनागर जी के साथ एक बड़ी ऑनलाइन ठगी हुई। 51 लाख रुपये की इस ठगी ने पूरे शहर में खलबली मचा दी। आशा जी ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, और पुलिस ने श्रीनगर निवासी मीर मुदस्सर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। यह प्रदेश का पहला डिजिटल अरेस्ट केस था, जिसने सबको हैरान कर दिया था।

 समझौता और FIR रद्द: एक अनोखा मोड़-लेकिन, कहानी में एक दिलचस्प मोड़ आया। आरोपियों ने आशा जी को उनका पूरा पैसा वापस कर दिया। इसके बाद, आशा जी ने मानवीयता दिखाते हुए आरोपियों के साथ समझौता कर लिया और पुलिस में दर्ज FIR वापस ले ली। यह फैसला वाकई में चौंकाने वाला था!

 हाईकोर्ट का फैसला: सभी आरोपी बरी-इस समझौते के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने माना कि जब पीड़िता और आरोपी आपस में समझौते पर पहुँच गए हैं और नुकसान की भरपाई हो गई है, तो केस को आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। नतीजा? सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया!

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?-डिजिटल अरेस्ट का मतलब है किसी को ऑनलाइन धमकाकर या डराकर ठगी का शिकार बनाना। ग्वालियर का यह केस इसलिए खास था क्योंकि यह प्रदेश का पहला ऐसा केस था। हालांकि, अब यह मामला समझौते के साथ खत्म हो गया है।

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