रायपुर: रायपुर नगर निगम में महापौर समेत 70 में से 60 वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों को मिली एकतरफा जीत ने इतिहास रच दिया है। इस जीत में सभी की भागीदारी रही,लेकिन रणनीति के तहत पूरी टीम के साथ दिन रात एक कर चुनाव का संचालन व प्रबंधन को अंजाम देने में पूर्व मंत्री व विधायक राजेश मूणत की महती भूमिका को सभी स्वीकार रहे हैं। निगम की शहरी सत्ता में पन्द्रह साल से काबिज कांग्रेस महापौरों के कार्यों को लेकर मूणत खासे नाराज थे। जिस दिन से वे विधानसभा का चुनाव जीते थे उसी दिन से शहर की जनता का नब्ज वे पकड़ चुके थे। शहर के विकास को बाधित करने वालों को बाहर करने का लक्ष्य लेकर पहले उन्होने हर वार्ड के भाजपा कार्यकर्ताओं को रिचार्ज किया। लगातार मीटिंग पर मीटिंग वे भाजपा कार्यालय में करते रहे। सभी बड़े नेताओं को संगठन में फीड बैक देते रहे। जब बात प्रत्याशी चयन की आयी तो पहल टारगेट रखा गया जीत..। चाहे कोई भी नाराज हो,वार्ड से जिसकी जीत तय दिखती हो उन्हे प्रत्याशी बनाया जायेगा। चारो विधानसभा के विधायकों,सांसद,संगठन पदाधिकारियों से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच लगातार संवाद स्थापित करवाते रहे। रणनीति के तहत उन्होने जिस वार्ड के रहने वाले पार्टी नेता हैं उन्हे वहीं काम संभालने कहा गया। महापौर के प्रत्याशी मीनल चौबे का नाम भी सर्वसम्मति से तय हुआ था,भले ही उन्हे मूणत का करीबी बताया जाता है। महापौर व वार्ड प्रत्याशियों के बीच लगातार समन्वय बनाकर प्रचार प्रसार करने की रणनीति भी मूणत की थी। जिसका दोनों को फायदा मिला। संसाधन की भी उन्होने कहीं कमी नहीं होने दी। अंदेशा था कम मतदान होगा इसलिए बूथ मैनेजमेंट को लेकर भी उन्होने खाका बनाया। मतदान से पहले ही जिस प्रकार का माहौल बन गया था,तय लग रहा था कि भाजपा को एक बड़ी जीत मिलने वाली है और आज परिणाम आने के बाद यह साफ भी हो गया। भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ शहर की जनता भी मान रही है कि इस बड़ी जीत का बड़ा श्रेय विधायक राजेश मूणत को जाता है।
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